बिहार में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत हो रही जाँच में चुनाव अधिकारियों ने पाया है कि अब तक 52 लाख से ज़्यादा मतदाता अपने पते पर नहीं रहते थे और 18 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है। चुनाव आयोग ने मंगलवार को बताया कि 26 लाख मतदाता दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों में चले गए हैं, जबकि सात लाख मतदाता दो अलग-अलग जगहों पर पंजीकृत हैं।
राज्य के चुनाव अधिकारियों ने उन 21.36 लाख मतदाताओं की सूची साझा की है जिनके गणना प्रपत्र अभी तक नहीं मिले हैं और साथ ही लगभग 52.30 लाख मतदाताओं की ऐसी सूची साझा की है, जो कथित तौर पर मृत हैं या स्थायी रूप से दूसरे राज्यों में चले गए हैं या कई जगहों पर पंजीकृत हैं।
पदाधिकारियों ने कहा कि जिन 12 राजनीतिक दलों को ऐसे मतदाताओं की सूची दी गई है जो दूसरे जगहों पर चले गए हैं, नहीं मिले हैं या जिनकी मृत्यु हो गई है, उन्हें पता चल जाएगा कि ऐसे नामों को मसौदा सूची में क्यों शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे मतदाताओं से संपर्क करने के लिए कहा गया है ताकि वे मसौदा सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए राज्य के चुनाव अधिकारियों से संपर्क कर सकें।
दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी ताकि ये तय किया जा सके कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति चुनाव आयोग की लिस्ट में न शामिल हो।