असम में विरोध प्रदर्शन के दौरान सहाकरी बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) से संस्था में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल पूछने पर ‘डिजिटल समाचार पोर्टल’ के एक पत्रकार को पुलिस ने नौ घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद गिरफ्तार कर लिया। दिलवर हुसैन मजूमदार को बुधवार शाम कामरूप अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने जमानत दे दी।
इस गिरफ्तारी के बाद राज्य भर में मीडियाकर्मियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। पत्रकार को मंगलवार दोपहर पानबाजार थाने में बुलाकर हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मजूमदार ‘गौहाटी प्रेस क्लब’ के सहायक महासचिव भी हैं और उन्हे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की आपराधिक धमकी, किसी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जानजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मध्य रात्रि के बाद गिरफ्तार किया गया।
ये घटना उस समय हुई जब पत्रकार ने असम कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक लिमिटेड के एमडी से सवाल पूछा, इससे पहले विपक्षी असम जातीय परिषद की युवा शाखा - जातीय युवा शक्ति (जेवाईएस) ने मंगलवार को कथित वित्तीय अनियमितताओं के विरोध में बैंक के सामने धरना दिया था। मजूमदार एक शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में मुख्य आरोपी है, जिसका नाम गिरफ्तारी सूचना रिपोर्ट में नहीं लिखा गया है।
शिकायत में कहा गया है कि पत्रकार की टिप्पणी जानबूझकर अनुसूचित जनजाति से संबंधित शिकायतकर्ता को अपमानित करने के लिए थी। आरोपी को शिकायतकर्ता या गवाहों को प्रभावित करने से रोकने, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचने के लिए गिरफ्तारी आवश्यक थी।
डिजिटल पोर्टल ‘द क्रॉस करंट’ के मुख्य संवाददाता मजूमदार ने भी पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई है और वो शिकायत अभी तक पंजीकृत नहीं हुई है। मजूमदार ने आरोप लगाया कि एमडी के कक्ष के अंदर विरोध प्रदर्शन की एक वीडियो रिकॉर्डिंग को हटा दिया गया था और उन्होंने पत्रकार से यह भी कहा था कि वे सुनिश्चित करें कि प्रदर्शन रुक जाएं।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (एपीयूडब्ल्यूजे) ने गुवाहाटी में असम पुलिस द्वारा वरिष्ठ पत्रकार मजूमदार की गिरफ्तारी की बुधवार को निंदा की। एपीयूडब्ल्यूजे के अध्यक्ष अमर सांगनो ने कहा, ‘‘ऐसी कार्रवाइयां न केवल प्रेस को डराती हैं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए बनी संस्थाओं में जनता का भरोसा भी खत्म करती हैं।’’
असम: बैंक अधिकारी से ‘वित्तीय अनियमितताओं’ के बारे में सवाल पूछने पर पत्रकार गिरफ्तार
You may also like
Sant Sansad 2026: 'जब जब देश पर संकट आया संतों ने आगे आकर दुश्मन को करारा जवाब दिया' — ईश्वर दास जी महाराज.
Sant Sansad 2026: 'हमारे देश का संगत और पंगत का सिद्धांत ही राष्ट्रवाद का प्रतीक है' — स्वामी वीर सिंह हितकारी.
Sant Sansad 2026: 'हमें देश के सिद्धांतों का ज्ञान होना चाहिए, राष्ट्र के प्रति समर्पित होना चाहिए'— स्वामी भरत दास जी.
Sant Sansad 2026 : हमारी देवदृष्टि अलग हो सकती है, देश दृष्टि नहीं — संजीव कृष्ण ठाकुर.