Bengal SIR: उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 31 मार्च यानी मंगलवार तक कुल 60 लाख आपत्तियों में से लगभग 47.4 लाख का निपटारा किए जाने पर बुधवार को गौर किया और इस प्रक्रिया में हुई प्रगति पर संतोष जताया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस प्रक्रिया की प्रगति के बारे में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिले दो पत्रों का संज्ञान लिया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम इन तथ्यों और आंकड़ों से काफी खुश हैं और बहुत आशावादी हैं।’’
उन्होंने इस बात पर गौर किया कि रोजाना करीब 1.75 लाख से दो लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा रहा है। न्यायालय को बताया गया कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने या हटाए जाने के खिलाफ अपीलों की सुनवाई के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के गठन की अधिसूचना जारी की है। इनकी अध्यक्षता उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश करेंगे।
प्रधान न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि न्यायाधिकरणों को निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड तक पूरी पहुंच दी जाए जिसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 700 न्यायिक अधिकारियों की ओर से दर्ज किए गए कारण भी शामिल होंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पक्षकारों को भी ये कारण उपलब्ध कराए जाएं।
न्यायालय ने यह भी कहा कि न्यायाधिकरण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप अपनी प्रक्रिया तय कर सकते हैं, लेकिन उन्हें दस्तावेजों की सत्यता की जांच किए बिना नए दस्तावेज स्वीकार करने से बचना चाहिए।
न्यायालय ने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को यह भी निर्देश दिया कि न्यायिक अधिकारियों, न्यायाधिकरणों के सदस्यों और कर्मचारियों को मानदेय और अन्य खर्चों का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उसने निर्वाचन आयोग से कहा कि या तो न्यायाधिकरणों के मौजूदा परिसर की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया जाए या संबंधित पक्षकारों से विचार-विमर्श कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘अब तक कुल 47 लाख से अधिक (दावों एवं आपत्तियों का) निस्तारण हो चुका है और निर्वाचन आयोग ने राज्य में 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इनकी अध्यक्षता उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश कर रहे हैं।’’
पीठ ने कहा कि अपीलीय न्यायाधिकरण उन लोगों की अपीलों पर फैसला करेंगे, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। साथ ही निर्वाचन आयोग के अधिकारी भी कथित रूप से गलत तरीके से नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपील कर सकेंगे।
पीठ ने कहा, ‘‘अपीलीय न्यायाधिकरण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप अपनी प्रक्रिया विकसित कर सकते हैं।’’ उसने निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को यह निर्देश भी दिया कि ‘‘सिफारिशों के अनुरूप न्यायिक अधिकारियों, न्यायाधिकरणों के सदस्यों और अन्य संबद्ध कर्मचारियों, यदि कोई हों, को आवश्यक भुगतान जारी किया जाए।’’
पीठ ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की इस सूचना का भी संज्ञान लिया कि सभी लंबित आपत्तियों पर संभवतः सात अप्रैल तक फैसला कर दिया जाएगा। प्रधान न्यायाधीश ने इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका सहित संबंधित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तारीख तय की। मुख्यमंत्री की ओर से पेश वकीलों समेत याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने नाम हटाए जाने की दर बहुत अधिक ‘‘करीब 45 प्रतिशत’’ होने पर चिंता जताई।
उन्होंने नए आवेदन दाखिल किए जाने और कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं के मुद्दे भी उठाए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘न्यायाधिकरणों को काम करने दें और मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने या हटाए जाने के मामलों का निपटारा करने दें।’’ हालांकि, पीठ ने कुछ आशंकाओं को ‘‘अत्यधिक तकनीकी’’ करार दिया और पक्षकारों को सलाह दी कि वे अपनी विशिष्ट शिकायतें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष रखें।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आखिरकार ऐसा नहीं है कि आपके पास कोई उपाय ही नहीं है।’’ शीर्ष न्यायालय पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा है।