Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा तट पर बना ये शिव कचहरी मंदिर, सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि इसे दिव्य न्यायालय के रूप में जाना जाता है। सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।
मान्यता है कि इस अनोखे मंदिर में भगवान शिव मुख्य न्यायाधीश के रूप में विराजमान हैं जो भक्तों के कर्मों का फैसला करते हैं। वहीं मंदिर में मौजूद अन्य 287 शिवलिंग वकीलों और न्यायालय अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
श्रद्धालु यहां माफी मांगने, प्राश्चियत करने करने और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। संगम नगरी के शिवकुटी क्षेत्र में बने इस मंदिर का निर्माण 1865 में नेपाल के राजा राणा जनरल पदमजंग बहादुर ने करवाया था।
कहा जाता है कि ये मंदिर इसलिए बनवाया गया ताकि राजा की पत्नियां एक साथ पूजा कर सकें। गुजरते वक्त के साथ मंदिर में भोलेनाथ से माफी मांगने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ती गई।
मंदिर में प्रवेश करने के बाद शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, फूल, धतूरा और दूध अर्पित करने के बाद कोई चिट्ठी लिखकर अर्जी लगाता है तो कोई बोलकर भोलेनाथ से माफी मांगता है।