हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में होली का पर्व अनोखे और पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है। यहां होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है और यह उत्सव करीब 40 दिनों तक बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ चलता है। अन्य स्थानों की तरह केवल एक-दो दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला यह पर्व कुल्लू की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
यह आयोजन भगवान रघुनाथ के सम्मान में मनाया जाता है, जिनकी कुल्लू में विशेष मान्यता है। बसंत पंचमी के दिन से मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और पारंपरिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो जाता है। स्थानीय लोग पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन जाता है।
थवा गांव स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में होलाष्टक के दौरान विशेष रौनक देखने को मिली। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य का भी आयोजन किया गया, जिससे माहौल भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो उठा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह लंबे समय तक होली मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। कुल्लू की यह अनोखी होली न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखती है।