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संत संसद में गुरुशरण जी महाराज का संबोधन, 'सरकारों में संतों का स्थान होना चाहिए'

जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की। 

इस विशेष कार्यक्रम में श्री श्री 1008 श्री गुरुशरण जी महाराज शामिल हुए। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, “श्री परमात्मा नमः। मंच पर विराजमान हमारे आदरणीय पीठाधीश, जगत गुरु एवं समस्त संत-महात्माओं के चरणों में मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष सहित अपने सभी वरिष्ठों और बड़े भाइयों को भी मेरा सादर प्रणाम।”

उन्होंने आगे करौली सरकार जी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे समाज में आध्यात्मिक शक्ति के माध्यम से जनमानस के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। साथ ही मेहंदीपुर पीठाधीश्वर और जगत गुरु चक्रपाणि जी महाराज के प्रति भी उन्होंने श्रद्धा व्यक्त की।

महाराज जी ने उपस्थित सभी ऋषि-मुनियों, महापुरुषों, आचार्यों और संत समाज को नमन करते हुए कहा कि आप सभी के प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पा रहा है। उन्होंने नेटवर्क10 के एडिटर-इन-चीफ संजय गिरी और उनकी पूरी टीम का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संतों को एक मंच पर लाकर ‘संत संसद’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह मंच केवल जयपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि टीवी के माध्यम से देश-विदेश तक इसकी बात पहुंच रही है। उन्होंने आग्रह किया कि सरकारों को संतों का मार्गदर्शन लेना चाहिए, क्योंकि संत समाज में आध्यात्मिक, ज्ञान और विज्ञान—तीनों प्रकार की शक्ति निहित होती है। उनके अनुसार, संतों के मार्गदर्शन से शासन व्यवस्था अधिक सुचारू रूप से चल सकती है और राष्ट्र को मजबूती मिल सकती है।

महाराज जी ने भारतीय संस्कृति, धर्म और मूल्यों की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि “हमें अपनी संस्कृति, धर्म, कुल और मूल्यों को सुरक्षित रखना होगा। जब हमारी जड़ें मजबूत रहेंगी, तभी राष्ट्र भी सशक्त बना रहेगा। हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारे राष्ट्र की पहचान हैं।” उन्होंने गौ माता और भारत माता के सम्मान को भी आवश्यक बताते हुए कहा कि “यदि हम अपनी मातृभूमि और संस्कृति का सम्मान नहीं करेंगे, तो राष्ट्र की मजबूती संभव नहीं है।” अंत में उन्होंने सभी से एकजुट होकर राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य करने का आह्वान किया और समाज में सद्भाव, एकता और जागरूकता बनाए रखने की अपील की।