प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को कर्नाटक में बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतीश जारकीहोली, उनकी सांसद बेटी प्रियंका जारकीहोली और उनसे जुड़े अन्य लोगों के करीब 18 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी की यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा में कथित अवैध धन हस्तांतरण और मनी ट्रेल की नए सिरे से जांच के तहत की गई है।
ईडी की अलग-अलग टीमों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सुरक्षा के साथ बेंगलुरु, बेलगावी और डॉलर्स कॉलोनी समेत कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह जांच फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। एजेंसी विदेशी फंड ट्रांसफर और कथित अवैध लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य सबूतों की जांच कर रही है।
ईडी की कार्रवाई के बाद कर्नाटक में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने और डराने के लिए ईडी, आयकर विभाग और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सांसद प्रियंका जारकीहोली के ठिकानों पर छापेमारी से पहले लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति ली गई थी।
हरिप्रसाद ने यह भी सवाल किया कि मंत्री के रिश्तेदार वाई.डी. मंजूनाथ के मामले में उनके पिता, जो पूर्व भाजपा सांसद रह चुके हैं, उनके ठिकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी ईडी की छापेमारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि सतीश जारकीहोली वरिष्ठ नेता हैं और व्यावसायिक तथा सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानूनी जांच से डरने वाली नहीं है और जांच एजेंसियों के सामने कानून के मुताबिक सहयोग किया जाएगा।
शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। वहीं, मंत्री प्रियांक खरगे ने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में हुई ईडी की 97 प्रतिशत से अधिक छापेमारी विपक्षी नेताओं के खिलाफ हुई है। उन्होंने इसे राजनीतिक विद्वेष का नतीजा बताया।बताया जा रहा है कि ईडी की यह कार्रवाई मंत्री सतीश जारकीहोली के बहनोई और आबकारी अधिकारी वाई.डी. मंजूनाथ से जुड़े पुराने मामले से अलग है। नई जांच में एजेंसी का फोकस कथित विदेशी फंड ट्रांसफर, विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन और मनी ट्रेल पर है।
ईडी की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कर्नाटक में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हैं। कांग्रेस ने छापेमारी को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, जबकि जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सबूत जुटाने में लगी है।