दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ अभियान चलाए जाने की उम्मीद है। दिल्ली सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने MCD के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहकर कार्रवाई की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
अवैध निर्माण के खिलाफ यह अभियान पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टलों तक भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिल्लीभर में PG और हॉस्टलों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। जहां भी बिना अनुमति निर्माण पाया जाएगा, वहां नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों से भवनों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच करने को कहा गया है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कथित अवैध निर्माण कब हुआ और उस समय उस इलाके की जिम्मेदारी किस प्राधिकरण या प्रशासन के पास थी।
सरकार का उद्देश्य सिर्फ नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की पहचान करना ही नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना है कि अवैध निर्माण कब और किसकी अनुमति या लापरवाही से हुआ। दिल्ली सरकार भवन निर्माण से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने और नागरिक एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दे रही है। MCD के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर रहकर अभियान की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कार्रवाई नियमों के अनुसार हो।
मुख्यमंत्री के ये निर्देश दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद आए हैं। यहां PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत गिर गई थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। पुलिस ने सोमवार को इस मामले में संपत्ति की मालिक 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, उनके पति 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता और उनके बेटे 52 वर्षीय महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा मजदूर ठेकेदार सोनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया और पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया।
इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े और उसके अधीन आने वाले कॉलेजों में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।