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अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल भारत के लिए क्या मायने रखता है?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कड़े मुकाबले में डोनाल्ड ट्रंप के जीत हासिल करने के बाद रणनैतिक मामलों के जानकारों को उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन के तहत भारत-अमेरिका संबंध आगे बढ़ेंगे। हालांकि उनका मानना है कि आयात, टैरिफ और इमिग्रेशन जैसे मुद्दों को लेकर कुछ चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और अमेरिका के प्रमुख रणनैतिक साझेदार के रूप में, भारत को ट्रंप प्रशासन के साथ अपने संबंधों में एक तरफ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसके पास मौके भी हैं।

अपने चुनाव अभियान में डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी सामान, खास तौर से चीन से आयातित चीजों पर ज्यादा टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही उन्होंने एक बड़े निर्वासन कार्यक्रम की शुरूआत करके अमेरिका को सभी अवैध अप्रवासियों से मुक्त करने की कसम खाई थी।

इमिग्रेशन और टैरिफ पर ट्रंप के सख्त रुख का हवाला देते हुए जानकारों का कहना है कि भारत को इन मुद्दों पर अगले प्रशासन के साथ कुछ गंभीर बातचीत की जरूरत पड़ सकती है।

अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई लोगों ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान खासकर इमिग्रेशन जैसे मुद्दे को लेकर अपनी चिंता जताई है। चीन को लेकर ट्रंप का कड़ा रुख भारत को रणनैतिक तौर से फायदा पहुंचा सकता है, जिससे रक्षा सहयोग मजबूत हो सकता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के हितों के साथ जुड़ सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत दोस्ती को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच कठिन मुद्दों को बेहतर माहौल के साथ सुलझाए जाने की संभावना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ट्रंप को उनकी ऐतिहासिक जीत पर सबसे पहले बधाई देने वाले दुनिया भर के नेताओं में शामिल थे। एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि वे "भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक और रणनैतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।" प्रधानमंत्री मोदी ने जीत के बाद डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत भी की।