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US Election 2024: ट्रंप-हैरिस में करीबी मुकाबला

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उप-राष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के बीच गंभीर नीतिगत फर्क देखने को मिल रहा है।

राजनैतिक रस्साकशी में दोनों उम्मीदवार गर्भपात कानून, ट्रांसजेंडर अधिकार, इमिग्रेशन, वीजा नीतियों और आर्थिक नीतियों जैसे प्रमुख मुद्दों पर आमने-सामने हैं।ट्रम्प अमेरिकी आयात पर 10 फीसदी से ज्यादा टैक्स लगाना और अमेरिका को "धरती की क्रिप्टो राजधानी" में बदलना चाहते हैं, जबकि हैरिस मध्यम और छोटे वर्ग के कारोबारियों को बेहतर मौके देने की पैरोकारी हैं।

हैरिस ने देश भर में महिलाओं के गर्भपात अधिकार को बहाल करने के लिए संघीय कानून लाने का वादा किया है। ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के तीन जज नियुक्त किए, जिन्होंने गर्भपात का संवैधानिक अधिकार खत्म करने के लिए वोट दिया था। जानकारों के मुताबिक ट्रम्प तय नहीं कर पाए हैं कि अगर वे जीत गए तो इस मुद्दे से कैसे निपटेंगे।

हैरिस मौजूदा इमिग्रेशन नीति से निराश हैं। उन्होंने देश की सीमाओं को सुरक्षित करने और ऐसी इमिग्रेशन पॉलिसी बनाने का वादा किया है, जो व्यवस्थित और इंसानियत भरी हो।

हैरिस का कहना है कि बॉर्डर सिक्योरिटी बिल के सख्त कानून सीमा पर अवैध इमिग्रेशन कम करेंगे। दूसरी ओर ट्रम्प ने बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को निकाल बाहर करने को कहा है।

जलवायु परिवर्तन पर हैरिस और ट्रम्प के रुख में जमीन-आसमान का फर्क है। ट्रम्प ने इस मुद्दे को "धोखा" करार दिया है। उन्होंने सत्ता में आने पर पेरिस जलवायु समझौते से फिर बाहर निकलने को कहा है। इसके उलट हैरिस ने अपने चुनाव प्रचार में हरित ऊर्जा में इन्वेस्टमेंट करने और अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय जलवायु मिशन को आगे बढ़ाने का वादा किया है।

ट्रम्प ने मध्य पूर्व और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों के जल्द उपाय तलाशने का वादा किया है। उन्होंने यूक्रेन को बाइडेन प्रशासन से दी जा रही वित्तीय मदद का विरोध किया है। इसके विपरीत हैरिस ने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने का वादा किया है।

उप-राष्ट्रपति हैरिस बाइडेन प्रशासन की तरह सिविल सर्वेंटों की सुरक्षा की तरफदारी कर रही हैं, जबकि ट्रम्प का कहना है कि वे सिविल सर्वेंटों पर लगाम कसेंगे और अमेरिकी नौकरशाही को नया आकार देंगे। हैरिस ट्रांसजेंडर अधिकारों की भी वकालत कर रही हैं, जबकि ट्रम्प ने इन अधिकारों का जोरदार विरोध किया है।