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क्यों नहीं टिकते बिहार के पुल? नीतीश कुमार के ड्रीम प्रजोक्ट पर लगा ब्रेक

बिहार में पुलों के गिरने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. जहां एक बार फिर से निर्माणाधीन पुल गिरने की खबर सामने आई है. जो कि नीतीश कुमार का ड्रीम प्रजोक्ट है. 1600 करोड़ का ये पूरा प्रोजेक्ट है जिसका एक हिस्सा गिर गया है और इस पुल के गिरने से समस्तीपुर से लेकर पटना तक राजनीतिक भूचाल आ गया है. पटना के बख्तियारपुर और ताजपुर के बीच जो पुल बन रहा है जिसे नीतीश कुमार का ड्रीम प्रजोक्ट बताया जाता है लेकिन रविवार रात अचानक इस पुल का एक हिस्सा गिर गया और नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया. इस घटना के बाद समस्तीपुर से लेकर पटना तक खलबली मच गई. जिस तरह से आनन-फानन में मलबे को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया उसने नीतीश सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया है. जहां नीतीश सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई है.

तेजस्वी यादव ने एक्स पर किया पोस्ट
तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि 𝟏𝟔𝟎𝟑 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन समस्तीपुर-बख्तियारपुर-ताजपुर गंगा महासेतु के संपर्क पथ का पुल भर-भराकर गिर गया. एक सप्ताह पूर्व करोड़ों की लागत से जमुई के बरनार नदी पर बना पुल भी धंस गया था जबकि उसका कुछ दिन पूर्व ही 𝐂𝐌 ने कथित निरीक्षण किया था. 𝟐𝟎 वर्षों की 𝐍𝐃𝐀 सरकार की बुनियाद ही कमीशनखोरी, रिश्वत खोरी, संस्थागत भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, अवैध वसूली और अपराधी व अधिकारियों की संगठित लूट पर टिकी है. क्या प्रधानमंत्री मोदी जी, बतायेंगे कि बिहार में निरंतर पुलों का गिरना भ्रष्टाचारी संयोग है या प्रयोग?

बता दें कि साल 2011 में नीतीश कुमार ने करीब साढ़े पांच किलोमिटर लंबे इस पुल की आधारशिला रखी थी. जिसकी डेडलाईल साल 2015 थी यानि 2015 तक इसका काम पुरा हो जाना चाहिए था लेकिन इसे आगे बढ़ाकर 2020 कर दिया गया. फिर भी ये पुल अब तक पूरा नहीं हो पाया है.  

बीजेपी और जदयू के सुर अलग-अलग 
पुल गिरने के इस मामले में एक ही खेमें में होने के बावजूद जदयू और बीजेपी अलग-अलग सुर अलाप रहे हैं. बता दें कि बीजेपी की ओर से इस पुरे मामले में कांट्रेक्टर पर बात कही गई तो वहीं जदयू ने स्पैन नहीं गिरा कहकर इसे सिरे से खारिज कर दिया है।