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करण जौहर जहां भूले ‘मर्यादा’, ‘थ्री ऑफ अस’ ने उसे संभाले रखा

‘दिल ढूंढता है फिर वही, फुरसत के रात दिन’… 1975 में आई ‘मौसम’ फिल्म के लिए गुलज़ार साहब ने जब ये गीत लिखा होगा, तब उन्होंने नहीं सोचा होगा कि 2024 में भी लोगों की ख्वाहिश ऐसी ही होगी. इस गाने में एक अजीब सी सादगी है, ठीक वैसी ही सादगी और सच्चाई आपको शेफाली शाह, जयदीप अहलावत और स्वानंद किरकिरे की ‘थ्री ऑफ अस’ में देखने को मिलेगी. नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म में सिनेमा के कई अनूठे प्रयोग किए हैं, वहीं ये फिल्म अपनी ‘मर्यादा’ को बांधकर रखती है, जिसे करन जौहर ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में भुला देते हैं.

 ऑफ अस’ कहानी शैलजा देसाई (शेफाली शाह) की है. एक मिडिल एज औरत जिसे अल्जाइमर डिटेक्ट हुआ है. उसका एक पति दीपांकर देसाई (स्वानंद किरकिरे) है, एक बेटा (सिर्फ फोन पर) है और कुछ मिटती हुई यादें हैं जिन्हें वह संभालने के लिए मुंबई के पास ही ‘वेंगुरला’ में समेटने जाती है. जहां उसके बचपन का प्यार प्रदीप कामत (जयदीप अहलावत) भी है.