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पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर हलचल तेज, दो चरणों में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

West Bengal: चुनाव आयोग की टीम के पश्चिम बंगाल दौरे के बाद से राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. इसी बीच जानकारी आ रही है कि राज्य में विधानसभा चुनाव तीन से दो चरण में कराए जा सकते हैं. इसको लेकर चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के साथ राजनीतिक दलों की बैठक में बीजेपी समेत ज्यादातर दल इस सुझाव पर सहमत नजर आ रहे हैं.

दरअसल, सोमवार को बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की और राज्य में सुरक्षा माहौल को लेकर गंभीर चिंताएं जताई. इसी दौरान पार्टी ने एक 17 सूत्री ज्ञापन सौंपा, जिसमें चुनाव को निष्पक्ष और बिना हिंसा बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं. बीजेपी ने स्पष्ट रूप से मांग की कि चुनाव अधिकतम तीन चरणों में ही संपन्न हो, ताकि केंद्रीय सुरक्षा बलों का बेहतर इस्तेमाल हो सके और मतदाताओं में विश्वास बना रहे. 

ज्ञापन में कहा गया है कि वोटिंग और काउंटिंग दोनों ही केंद्रीय सुरक्षाबलों की निगरानी में होनी चाहिए. राज्य पुलिस की मतदान केंद्र और काउंटिंग सेंटर पर कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए. मतदान केंद्र पर वोटर की 2 बार जांच की जानी आवश्यक है. साथ ही मतदान कर्मियों यानी पोलिंग पार्टी में केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों का अनुपात 50:50 का रखने का सुझाव भी दिया गया है. मतगणना प्रक्रिया को भी केवल जिला और उप-मंडल मुख्यालयों में कराने पर बीजेपी ने जोर दिया है.

बीजेपी ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि पिछले तीन चुनावों में हिंसा वाले बूथों और जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, उन्हें 'संवेदनशील' बूथ माना जाए. केंद्रीय बलों की तैनाती बहुत पहले होनी चाहिए, इससे उनकी स्थानीय पुलिस पर निर्भरता कम होगी. बीजेपी ने ये भी मांग की है कि केंद्रीय बलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश हों कि वो स्थानीय लोगों से किसी भी तरह का आतिथ्य या खाना-पीना रहना स्वीकार न करें, ताकि तटस्थता बनी रहे. बीजेपी का कहना है कि पिछले चुनावों में बहु-चरणीय मतदान से हिंसा, धांधली और मतदाताओं पर दबाव की घटनाएं बढ़ीं. पार्टी ने पिछल् चुनावों के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि कम चरणों में चुनाव से सुरक्षा बलों का प्रभावी उपयोग संभव होगा और चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.