मणिपुर के इंफाल की रहने वाली वाहेंगबाम शाया देवी देश के उन पांच बुनकरों में से एक हैं जिन्हें 2023 के प्रतिष्ठित संत कबीर हैंडलूम पुरस्कार के लिए चुना गया है। अपने काम को
मिली पहचान पर खुशी जाहिर करते हुए शाया देवी कहती हैं, वह 40 साल से इस पेशे में हैं और उन्होंने कई अनोखे डिजाइन बनाए हैं।
शाया देवी बताती हैं कि वह संत कबीर हैंडलूम राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुने जाने से काफी उत्साहित हैं लेकिन वह चाहती हैं कि मणिपुर में हिंसा जल्द ही खत्म हो जाए क्योंकि इससे उनके काम पर काफी असर पड़ रहा है। शाया देवी उत्तर-पूर्व की एकमात्र कारीगर हैं जिन्हें इस साल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। संत कबीर हथकरघा पुरस्कार देश के उन बुनकरों को दिया जाता है जो देश की हथकरघा विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।