हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून अब तक सामान्य से 9 फीसदी कम रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में अगले 5 से 7 दिनों तक मानसून की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है। इस दौरान कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। आईएमडी हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शोभित कात्यायन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मानसून काफी कमजोर रहा है। पिछले 24 घंटों में शिमला, मंडी और कांगड़ा के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई, जबकि सिरमौर के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि अगले 4-5 दिनों तक अधिकांश इलाकों में मानसून कमजोर रहेगा और कुछ स्थानों पर मौसम साफ रहने की संभावना है। राज्य में अगले 4-5 दिनों के लिए भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। आईएमडी के अनुसार, 11-12 सितंबर के बाद मानसून की गतिविधियों में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। इसका असर मुख्य रूप से निचली पहाड़ियों, मैदानी क्षेत्रों और मध्य पहाड़ी इलाकों में दिखाई दे सकता है। हालांकि, अगले सात दिनों में भारी बारिश की किसी बड़ी घटना के संकेत नहीं हैं।
6 सितंबर तक हिमाचल में सामान्य तौर पर करीब 648 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान करीब 588 मिमी बारिश हुई है। इस तरह राज्य में करीब 9 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। हालांकि सितंबर के पहले सप्ताह में सामान्य से करीब 15 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। इसके बावजूद आईएमडी का अनुमान है कि सितंबर में राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। कांगड़ा, चंबा से सटे इलाकों और मंडी के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।
आईएमडी अधिकारी के मुताबिक, बारिश में कमी के पीछे बड़े स्तर पर वायुमंडलीय और समुद्री परिस्थितियों का अनुकूल नहीं होना प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि एल नीनो के साथ-साथ इंडियन ओशन डाइपोल और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन जैसे वैश्विक मौसम संबंधी कारक भी ज्यादातर समय अनुकूल नहीं रहे।
हिमाचल में मानसून की सामान्य वापसी करीब 25 सितंबर के बाद मानी जाती है। ऐसे में अभी मानसून की वापसी में करीब 18 से 20 दिन बाकी हैं। हालांकि, अगले 15-20 दिनों में मौसम की बड़ी गतिविधियां नहीं होने के कारण बारिश की कमी में कोई बड़ा सुधार होने की संभावना कम है। जिला स्तर पर किन्नौर, शिमला, मंडी और सिरमौर में अब तक सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश हुई है, जबकि बाकी जिलों में बारिश सामान्य या सामान्य से थोड़ी कम रही है।
मानसून कमजोर पड़ने के साथ राज्य में तापमान भी बढ़ने लगा है। निचले मैदानी इलाकों में दिन का तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस, जबकि मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। यह सामान्य से करीब दो डिग्री अधिक है। अगले चार दिनों में तापमान में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। कुछ इलाकों में तापमान 1 से 2 डिग्री और बढ़ सकता है। हालांकि, 11 सितंबर के बाद निचले मैदानी और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में कमी आने की संभावना है।
राज्य में फिलहाल कोहरे का कोई अलर्ट नहीं है। आईएमडी के अनुसार हिमाचल में घना कोहरा आमतौर पर सर्दियों के मौसम में देखने को मिलता है। कुछ स्थानों पर निचले बादलों के कारण थोड़े समय के लिए दृश्यता कम हो सकती है, लेकिन इसे व्यापक कोहरे की स्थिति नहीं माना जाएगा। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से 6 सितंबर के बीच 69 दिनों के मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुल 274 लोगों की मौत हुई है। इनमें 110 मौतें सीधे बारिश से जुड़ी घटनाओं में हुईं, जबकि 164 लोगों की जान सड़क हादसों में गई।
बारिश से जुड़ी 110 मौतों में 38 लोगों की मौत पेड़ या ऊंची चट्टानों से गिरने, 18 की भूस्खलन, 13 की डूबने, 11 की सांप के काटने और 10 की करंट लगने से हुई। एक मौत फ्लैश फ्लड, एक आग और 18 अन्य कारणों से हुई। कांगड़ा और शिमला में बारिश से जुड़ी सबसे ज्यादा 17-17 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके बाद लाहौल-स्पीति और सिरमौर में 15-15 तथा चंबा में 13 लोगों की मौत हुई है।
मानसून के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति तथा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का अनुमान ₹1,242.73 करोड़ तक पहुंच गया है। राज्य में 38 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 84 दुकानें और झोपड़ियां भी प्रभावित हुई हैं। इस दौरान 467 पशुओं की मौत हुई है। 7 सितंबर को राज्य में सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। सुबह 10 बजे 85 सड़कें बंद थीं, जो दोपहर 2 बजे तक घटकर 82 रह गईं। मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 36 सड़क मार्ग बंद हैं। इसके बाद सिरमौर में 18, कुल्लू में 11 और कांगड़ा में 10 सड़कें प्रभावित हैं।
बिजली व्यवस्था में भी सुधार हुआ है। प्रभावित डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर रीजन (DTR) की संख्या 59 से घटकर 49 हो गई। मंडी में 40, किन्नौर में 7 और शिमला में 2 DTR प्रभावित हैं। हालांकि, पेयजल योजनाओं की स्थिति बिगड़ी है। प्रभावित जलापूर्ति योजनाओं की संख्या सुबह 6 से बढ़कर दोपहर 2 बजे तक 13 हो गई। इनमें सिरमौर की 10, शिमला की 2 और चंबा की एक योजना शामिल है। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पानी की सुविधाओं को बहाल करने का काम जारी है। अगले कुछ दिनों में कमजोर बारिश की संभावना के चलते प्रशासन को रेस्क्यू, मरम्मत और बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिलने की उम्मीद है।