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संयुक्त राष्ट्र शांति सेना: भारत 30 देशों के सैन्य नेतृत्व की करेगा मेजबानी

संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में योगदान देने वाले देशों के सेना अध्यक्षों के सम्मेलन में चीन और पाकिस्तान को न्योता नहीं दिया गया है। यह सम्मेलन 14 से 16 अक्तूबर के बीच राजधानी दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। मंगलवार को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने बताया कि अब तक कुल 30 देशों के सेना प्रमुखों के आने की पुष्टि मिल चुकी है।

सम्मेलन में भारत के अन्य पड़ोसी देश मसलन श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल को न्योता दिया गया है। सम्मेलन में इटली, फ्रांस, इंडोनेशिया, ब्राजील, मलयेशिया और ब्राजील जैसे देश भी शामिल होंगे। लेफ्टिनेंट जनरल कपूर ने कहा कि भारत की संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भूमिका महज दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक और रणनीतिक प्रतिबद्धता रही है। भारत ने 1950 के दशक से अब तक 50 से अधिक मिशनों में 2.9 लाख से अधिक शांति सैनिक भेजे हैं, जिनमें 182 जवानों ने बलिदान भी दिया है।

सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग और संवाद को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही प्रौद्योगिकी के जरिये शांति अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने पर विचार होगा। सम्मेलन के दौरान भारत की आत्मनिर्भर सैन्य तकनीकों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिससे प्रतिभागी देश भारत की स्वदेशीकरण क्षमता से परिचित हो सकें। सम्मेलन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी समेत कई अधिकारी संबोधित करेंगे।

भारत ने साफ कर दिया है कि वो यूक्रेन या गाजा जैसे संघर्षरत इलाकों में अपने सैनिकों की तैनाती नहीं करेगा। सम्मेलन की जानकारी देते समय रक्षा मंत्रालय के अधिकारी विश्वेश नेगी ने कहा कि जब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की ओर से इस बारे में स्पष्ट रूप से मंजूरी न दी जाए और यह कदम संयुक्त राष्ट्र के चार्टर तले न हो, सैनिकों की तैनाती नहीं की जाएगी। नेगी ने कहा कि यूएनएससी की मौजूदा संरचना को देखते हुए इस प्रकार की तैनाती की संभावना नहीं है।