Breaking News

देहरादून: कार के सामान की दुकान में लगी आग     |   मई में भारत की इंडस्ट्रियल ग्रोथ बढ़कर 5.1 प्रतिशत हुई, अप्रैल में 4.9 फीसदी थी     |   2021 बंगाल हिंसा-हत्या केस: CBI ने आरोपी खालिद उज जमान को अरेस्ट किया     |   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 30 जून से 1 जुलाई तक आंध्र प्रदेश के दौरे पर रहेंगी     |   राजा रघुवंशी मर्डर केस में मेघायल हाई कोर्ट ने सोनम की जमानत बरकरार रखी     |  

UGC विवाद: क्या नए नियमों पर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई शुरू

सुप्रीम कोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हाल ही में अधिसूचित नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई शुरू हो गई है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि इसमें जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करने वाले वकील की दलीलों पर गौर किया।

वकील ने कहा, “सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है। मेरा मुकदमा ‘राहुल दीवान एवं अन्य बनाम भारत सरकार’ है।” इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियां दूर कर दी जाएं। हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।” भेदभाव की शिकायतों की जांच और समता को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समता समिति गठित करने को अनिवार्य करने वाले नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के तहत इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। याचिका में कहा गया है कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव तक सीमित कर दिया गया है। इन नियमों के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जहां छात्र समूह और संगठन इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं।