भगवान हनुमान को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। वे रामभक्त, परम पराक्रमी, ब्रह्मचारी और देवताओं के प्रिय हैं। भगवान हनुमान के कई रूपों का वर्णन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है, लेकिन ग्यारहमुखी हनुमान का रूप सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी माना जाता है। यह कथा त्रेतायुग के अंत की है। लंका में रावण वध के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे, तब देवताओं को लगा कि पृथ्वी से अधर्म समाप्त हो गया है। लेकिन एक गुप्त असुर दल, हिमालय के दुर्गम क्षेत्र में अब भी सक्रिय था। इन असुरों का नेता था महाबल, जिसे वरदान प्राप्त था कि उसे केवल वहीं योद्धा मार सकता है, जिसमें सभी प्रमुख देवताओं की शक्तियां समाहित हों।
देवताओं ने चिंतित होकर भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने कहा, “भगवान हनुमान में वह क्षमता है, लेकिन उन्हें अपनी पूर्ण शक्ति का स्मरण कराना होगा।” भगवान हनुमान ने जब देवताओं से महाबल के बारे में सुना, तो वे ध्यान में लीन हो गए। ध्यान के माध्यम से उन्होंने अपनी दिव्य शक्तियों को जाग्रत किया और ग्यारहमुखी रूप धारण कर लिया। यह रूप उनके सभी रूपों और शक्तियों का अद्भुत संयोग था।
भगवान हनुमान के ग्यारह मुख और उनका अर्थ:
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मुख्य हनुमान मुख – शक्ति और भक्ति का प्रतीक
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नरसिंह मुख – राक्षसों का संहार करने वाला
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गरुड़ मुख – विष, जादू और भूत-प्रेत से रक्षा करने वाला
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वराह मुख – पृथ्वी की रक्षा करने वाला
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हयग्रीव मुख – ज्ञान और मंत्रविद्या का स्वामी
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राम मुख – रामभक्ति और धर्म की रक्षा करने वाला
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शिव मुख – तप, योग और विनाश की शक्ति
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काल भैरव मुख – काल और मृत्यु पर नियंत्रण
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मदन मुख – प्रेम और आकर्षण की शक्ति
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कपिल मुनि मुख – योग और ध्यान का ज्ञान
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आदि मुख – ब्रह्मांड की आदि ऊर्जा का प्रतिनिधि
इस रूप में भगवान हनुमान का शरीर विराट और तेजस्वी हो गया। उनका स्वरूप इतना अद्भुत था कि देवता भी नतमस्तक हो गए।
महाबल का संहार
भगवान हनुमान आकाश मार्ग से हिमालय पहुंचे, जहां महाबल छिपा हुआ था। राक्षसों में भय फैल गया। महाबल ने कई मायावी अस्त्र चलाए, लेकिन भगवान हनुमान के ग्यारहमुखों से निकले तेज और मंत्रों से वे निष्क्रिय हो गए।
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गरुड़ मुख ने विष का प्रभाव काटा
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नरसिंह मुख से महाबल को घायल किया
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शिव मुख से उसकी रक्षा-शक्ति को समाप्त किया
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और अंत में मुख्य हनुमान मुख से महाबल का वध कर दिया।
यह कथा दर्शाती है कि जब भी अधर्म बढ़ता है, भगवान अपनी शक्तियों के माध्यम से धर्म की रक्षा करते हैं। ग्यारहमुखी हनुमान यह सिखाते हैं कि एक ही शरीर में प्रेम, भक्ति, बल, ज्ञान, साहस और करुणा जैसी शक्तियां समाहित हो सकती हैं। आज भी भारत के कई स्थानों पर ग्यारहमुखी हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं — जैसे:
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झुंझुनू (राजस्थान)
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पुणे (महाराष्ट्र)
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वाराणसी (उत्तर प्रदेश)