उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में कहा कि सोमनाथ मंदिर आज एक बार फिर उसी भव्यता के साथ खड़ा है और भारत के गौरव तथा स्वाभिमान का उद्घोष कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का विरोध करने वाली शक्तियां आज भी मौजूद हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आज सोमनाथ एक बार फिर उसी वैभव के साथ खड़ा है, जो भारत के गौरव और महिमा का संदेश देता है। दुर्भाग्य से आज भी कई ऐसी शक्तियां हैं जो भारत की आस्था, स्वाभिमान और सभ्यतागत गौरव के प्रतीक इन आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों को सम्मान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते नहीं देखना चाहतीं।”
राम मंदिर निर्माण में भी डाली गई बाधाएं
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, वही लोग बाद में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में भी बाधाएं खड़ी करते रहे। उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनरुद्धार में किसने बाधाएं डाली थीं। यही लोग समय-समय पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को रोकने और उसके समाधान में अड़चन पैदा करने का प्रयास करते रहे।”
आजादी के बाद सांस्कृतिक आत्मविश्वास बहाल करने का अवसर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत के पास राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सांस्कृतिक आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने का अवसर था, लेकिन उस समय की सरकारों में भारत की सभ्यता और सनातन परंपराओं के प्रति वैसी सोच नहीं थी।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के पुनर्जागरण को साकार होते देखा है।उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए उनके आभारी हैं। उनके मार्गदर्शन में आज हम सोमनाथ के गौरव की पुनर्स्थापना और काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप को देख पा रहे हैं।”
योगी आदित्यनाथ ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि आक्रमणकारियों ने मंदिरों की संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया, लेकिन वे यह नहीं समझ सके कि भारत की आत्मा शाश्वत, अमर और अविनाशी है। उन्होंने कहा कि यही सनातन चेतना सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में आज भी जीवित है।
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। यह पर्व भारत की सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आस्था की अदम्य शक्ति का उत्सव है। सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भारतीय आस्था का प्रमुख केंद्र है। वहीं, ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मनाया जा रहा है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया था।