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कोसी नदी में बिगड़ा प्रवासी पक्षियों के वास स्थल का नक्शा, विकास की मांग कर रहे वन्यजीव प्रेमी

उत्तराखंड के रामनगर में जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित कोसी बैराज इस क्षेत्र के सबसे बड़ी आर्द्रभूमि में से एक है। सिंचाई सुविधा होने के साथ-साथ ये हजारों पक्षियों का आश्रय स्थल भी है। इनमें सर्दियों के दौरान आने वाले कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। यह जगह पूरे साल देशी पक्षियों से गुलजार रहती है। यहां रंग-बिरंगे पक्षियों के झुंडों को दाना चुगते और बेफिक्री के साथ इधर-उधर टहलते हुए देखकर अक्सर राहगीर और पक्षी प्रेमी थम जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस आर्द्रभूमि में समृद्ध जैव विविधता की वजह से एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की क्षमता है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया जाता रहा है।

पक्षी प्रेमियों का कहना है कि जिला प्रशासन को इस क्षेत्र की क्षमता के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। उनके मुताबिक रख-रखाव का काम तभी किया जाना चाहिए जब अधिकांश प्रवासी पक्षी हजारों मील दूर अपने मूल आवासों में लौट जाएं। जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि वे पहले से ही आर्द्रभूमि को विकसित करने और इसे न सिर्फ पक्षी प्रेमियों के लिए, बल्कि पर्यावरण शिक्षा के लिए भी एक केंद्र में बदलने की योजना पर काम कर रहे हैं। कॉर्बेट क्षेत्र में लगभग 600 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें से 300 से ज्यादा प्रजातियां अकेले कोसी बैराज में और उसके आसपास पाई जाती हैं, जो इसके पारिस्थितिक महत्व को उजागर करती हैं।