एक नए अध्ययन में पता चला है कि जो लोग अपने मन की बात किसी से नहीं कहते और तनाव या निराशा को अपने अंदर ही दबाकर रखते हैं, उनकी याददाश्त जल्दी कमजोर हो सकती है। यह अध्ययन अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है और इसे जर्नल ऑफ प्रिवेंशन ऑफ अल्जाइमर डिजीज में प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने 1,500 से ज्यादा चीनी-अमेरिकी लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि जो लोग अक्सर खुद को निराश महसूस करते थे और अपनी परेशानियां किसी से साझा नहीं करते थे, उनमें समय के साथ याददाश्त तेजी से कमजोर हुई। जब कोई व्यक्ति अपनी चिंता और दुख किसी से नहीं बताता, हमेशा तनाव में रहता है, भविष्य को लेकर उम्मीद छोड़ देता है, तो इसका असर दिमाग पर पड़ता है। इससे सोचने-समझने और चीजें याद रखने की क्षमता कम हो सकती है।
तनाव और निराशा को कम किया जा सकता है। इसके लिए परिवार और दोस्तों से बात करें, अकेलेपन से बचें, योग और ध्यान करें, जरूरत हो तो डॉक्टर या काउंसलर की मदद लें। शोधकर्ताओं का कहना है कि तनाव और निराशा का इलाज संभव है। अगर समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए, तो याददाश्त को लंबे समय तक बेहतर रखा जा सकता है। यह अध्ययन बताता है कि मानसिक तनाव केवल मन पर ही नहीं, बल्कि दिमाग और याददाश्त पर भी असर डालता है। इसलिए भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।