Breaking News

यदि कोई बेटियों से छेड़छाड़ या अपराध का दुस्साहस करेगा तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी: योगी     |   ‘J-K, लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग’, चीन-PAK संयुक्त बयान पर MEA ने कहा     |   कर्नाटक संकट: बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल बोले- आज राज्यसभा और MLC चुनाव पर चर्चा हुई     |   कर्नाटक संकट को लेकर दिल्ली में जारी कांग्रेस की बैठक खत्म     |   कर्नाटक संकट: कांग्रेस नेताओं के साथ जारी है राहुल गांधी की बैठक     |  

Jaipur: त्योहारों के सीजन में सांगानेरी प्रिंट की भारी मांग, 500 साल से ज्यादा पुरानी है कला

राजस्थान की सांगानेरी प्रिंट पारंपरिक हैंड-ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक है। ये तकनीक सांगानेर गांव से शुरू हुई थी। प्रिंटिंग में रंग-बिरंगे डिजाइन होते हैं। इनमें फूल, ज्यामितीय पैटर्न और प्रकृति से प्रेरित थीम होती हैं। त्योहार के मौसम में हैंड-ब्लॉक प्रिंटिंग की भारी मांग है। लिहाजा जयपुर में कारीगर बड़े जतन से इन्हें तैयार कर रहे हैं।

माना जाता है कि सांगानेरी प्रिंट 16वीं सदी में शुरू हुई थी। इसमें सब्जियों और फलों से निकाले गए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता है। सांगानेरी प्रिंट वाले कपड़ों के रंग खराब नहीं होते। उनकी यही खासियत खरीदारों को लुभाती है। पेचीदे डिजाइनों के लिए मशहूर प्रिंट की विरासत 500 साल से ज्यादा पुरानी है। ये अमूमन सफेद और ऑफ-व्हाइट कपड़ों पर बनाए जाते हैं।

फैक्ट्री मालिक ने बताया, "देखो सांगानेरी प्रिंट की हमारी ये खूबी है कि सांगानेर में जो कलर केमिकल काम में लिए जाते हैं कपड़े के प्रति, हमारे काम के प्रति जो भी हम कलर केमिकल यूज में लेते हैं कपड़े को हमारे बाहरी रूप में दिखावे के लिए तो हम जो कपड़ा और कलर केमिकल काम में लेते हैं वो बिल्कुल अलग तरीके का काम में लेते हैं, बजाय दूसरों के तो हमारा जो भी प्रोसेस रहता है इस काम को करने का, छापने का वो बिल्कुल हटकर रहता है। हम जैसे और जो बाहर कपड़े की रंगाई, छपाई होती है उससे जरा हटकर हमारे यहां रंगाई, छपाई होती है। मशीनों का बहुत कम यूज लिया जाता है। हम हाथ पर ज्यादा विश्वास करते हैं, क्योंकि हाथ के काम में चमक ज्यादा आती है।"