निर्वाचन आयोग ने दिल्ली समेत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है, क्योंकि इस प्रक्रिया के अप्रैल से शुरू किए जाने के आसार हैं। एक बार ये प्रक्रिया पूरी हो जाने पर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) इसके दायरे में आ जाएंगे।
आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के अखिल भारतीय एसआईआर का आदेश पिछले साल जून में दिया गया था।
विपक्षी कांग्रेस द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों से घिरे निर्वाचन आयोग ने इस साल 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और असम में एक ‘विशेष पुनरीक्षण’ कराया। शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया इस वर्ष करने की तैयारी है। बिहार में ये प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके कारण निर्वाचन आयोग लगातार सुर्खियों में रहा। हालांकि, लगभग 60 करोड़ मतदाताओं वाले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ये प्रक्रिया अभी जारी है।
शेष 40 करोड़ मतदाताओं को इन 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल किया जाएगा। असम में एसआईआर के बजाय ‘विशेष पुनरीक्षण’ 10 फरवरी को पूरा हो गया था। आलग-अलग कारणों से, नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की समय-सारणी में बार-बार फेरबदल किया गया है। बिहार की तरह, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक दलों ने एसआईआर को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। हाल ही में, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राज्य में मतदाता सूची में संशोधन के खिलाफ भारत के प्रधान न्यायाधीश की पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से दलील दी।