राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को दो साल आज पूरे हो गए है। इन दो वर्षों में न केवल मुख्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ, बल्कि राम जन्मभूमि परिसर 14 अन्य भव्य मंदिरों से सज्जित होकर एक विराट धार्मिक-सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित हो चुका है। करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर परिसर अब केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, स्थापत्य कौशल और आधुनिक सुविधाओं का अद्वितीय संगम बन गया है।
राम मंदिर में बाल स्वरूप रामलला तो विराजमान हैं ही, अब प्रथम तल पर राम परिवार के भी दर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा 800 मीटर लंबा परकोटा भी बनकर तैयार हो गया है। परकोटा में छह देवी-देवताओं (भगवान शंकर, गणेश, सूर्य, हनुमान, माता भगवती, अन्नपूर्णा) के मंदिर भी आकार ले चुके हैं। इन मंदिरों ने परिसर की आध्यात्मिक गरिमा को और ऊंचाई दी है।
दो साल के भीतर श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए आधुनिक दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, डिजिटल सूचना प्रणाली, सुगम मार्ग, प्रतीक्षालय, पेयजल, स्वच्छता और दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं विकसित की गई हैं। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए रामनगरी अब सुव्यवस्थित और सुसज्जित धार्मिक नगरी के रूप में उभरी है।