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कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर देशभर में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, कर रहे हैं पूजा-अर्चना

कार्तिक पूर्णिमा के पावन मौके पर बुधवार को देश भर में लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। यह एक शाश्वत परंपरा है जो हिंदू चंद्र कैलेंडर में कार्तिक माह के खत्म होने का प्रतीक है। माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान से दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तरह के दुखों से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालु इस दिन को देव दीपावली के तौर पर भी मनाते हैं।

हिंदू मान्यता के मुताबिक भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर का वध कर उसके अत्याचारों से सभी को मुक्त कराया था, जिससे प्रसन्न देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली मनाई जाने लगी।

कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार में बुधवार को तड़के हर की पौड़ी घाट पर गंगा स्नान के लिए बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के मुताबिक घाटों पर भगवान विष्णु को दीये और दूसरी पवित्र चीजें अर्पित कर अनुष्ठान किया। उत्तर प्रदेश में पवित्र नगरी अयोध्या में श्रद्धालु इस खास मौके पर सरयू नदी में स्नान कर रहे हैं।

अयोध्या में पुलिस और प्रशासन का कहना है कि शहर आ रहे श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसलिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर सबसे प्राचीन शहर माने जाने वाले वाराणसी में परंपराओं और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु पूरे भक्ति-भाव के साथ स्नान और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

ओडिशा में लोग कार्तिक पूर्णिमा पर अपनी समुद्री विरासत को याद करने के लिए मनाते हैं। बोइता बंदना के नाम से मशहूर यह दिन उन प्राचीन नाविकों को सम्मान है, जिनके व्यापारिक कौशल दूर-दूर तक फैले थे। यह दिन सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक की जयंती यानी गुरुपर्व के साथ भी मेल खाता है, जिसे पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है।