उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आजम खान से मुलाकात, सपा सरकार के दौरान हुए कथित घोटालों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव को घेरा। राजभर ने कहा कि आजम खान के साथ सबसे बड़ा अन्याय खुद अखिलेश यादव ने किया है। उन्होंने सपा प्रमुख को चुनौती देते हुए मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करने को भी कहा।
सपा का शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं: राजभर
ओम प्रकाश राजभर ने सपा की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी का शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वह दोपहर 12 बजे सोकर उठते हैं और फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं।
राजभर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव को शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलाव देखने हैं, तो उन्हें सपा सरकार के समय के प्राथमिक विद्यालयों और योगी सरकार के कार्यकाल के स्कूलों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए हैं। इन विद्यालयों के माध्यम से मजदूरों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।
आजम खान के साथ अखिलेश यादव ने किया अन्याय
आजम खान से जुड़े मामले पर राजभर ने कहा कि उनके साथ सबसे ज्यादा अन्याय अखिलेश यादव ने किया है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में हुए कई मामलों की जांच चल रही है और मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं।
राजभर ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और गोमती रिवर फ्रंट परियोजनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि इन परियोजनाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं के लिए क्या केवल आजम खान जिम्मेदार हैं या अखिलेश यादव की भी जवाबदेही बनती है? उन्होंने कहा कि इन मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने की अखिलेश यादव को चुनौती
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सपा प्रमुख वास्तव में मुस्लिम समाज के हितों को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करना चाहिए।
राजभर ने अखिलेश यादव के रामपुर दौरे और आजम खान से मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे चुनावी जुमला करार देते हुए कहा कि केवल मुलाकात करने से मुस्लिम समाज के प्रति प्रतिबद्धता साबित नहीं होती। उनके इस बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और सुभासपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत हैं।