उत्तर प्रदेश के हिंदू और मुस्लिम कारीगर दशहरे के लिए रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जम्मू में मिलकर बना रहे हैं। पिछले कई सालों से ये कारीगर हर साल दशहरे के वक्त जम्मू के गीता भवन में पुतले बनाने के लिए आते हैं। उनके ये पुतले पूरे जम्मू कश्मीर में बेचे जाते हैं।
करीब 50 कारीगरों की टीम बांस से पुतलों का बेस बनाने में जुटी है। इनमें कुछ पुतलों की ऊंचाई 50 फीट से ज्यादा है। देशभर में विजयादशमी पर रावण दहन होता है। दशहरे का त्योहार नवरात्र के आखिरी दिन मनाया जाता है। ये बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
जम्मू में हिंदू-मुस्लिम कारीगरों का एक साथ काम करना दिखाता है कि देश में धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव के बावजूद सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारा आज भी जिंदा है।