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पहलगाम हमले के विरोध में बंद रहा जम्मू कश्मीर, 35 साल में पहली बार घाटी में इतना बड़ा लॉकडाउन

कश्मीर घाटी के बाजार बुधवार को पहलगाम आतंकवादी हमले के खिलाफ बंद रहे। ऐसा 35 सालों में पहली बार हुआ क्योंकि सभी क्षेत्रीय संगठनों ने आतंकी हमले के विरोध का समर्थन किया। 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया था।

दिल दहला देने वाले आतंकी हमले के खिलाफ श्रीनगर में दुकानें, ईंधन स्टेशन समेत तकरीबन पूरा बाजार बंद रहा केवल दवा जैसी जरूरी चीजों की दुकान खुलीं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आतंकवादी हमले के विरोध में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक मार्च का नेतृत्व किया।

घाटी में कई अन्य स्थानों पर भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने हमले की निंदा की। मेंढर में लोगों ने एकजुटता दिखाते हुए मार्च निकाला और पर्यटकों की हत्या पर अफसोस जताया। कुलगाम और बांदीपुरा में भी लोगों ने बंद का पालन किया और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की अपील की। 

गांदरबल के स्थानीय लोगों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे कश्मीरियत की भावना और अतिथि देवो भव की पुरानी परंपरा पर जघन्य हमला बताया। जम्मू के कई हिस्सों में भी आतंकी हमले के विरोध में विरोध प्रदर्शन किए गए और बाजार बंद रखा गया। 

जम्मू शहर के अलावा रियासी, उधमपुर, कटरा, कठुआ और सांबा जिलों में भी बंद का पूर असर दिखा। जम्मू की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हिंदू संगठनों के सदस्यों ने हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया।

जम्मू और कश्मीर बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भी पीड़ितों के लिए इंसाफ की मांग की। पहलगाम में हुई हत्याओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यही वजह है क्या आम और क्या खास हर कोई हमले की निंदा कर रहा है। पहलगाम हमले के बाद से कश्मीर घाटी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। श्रीनगर शहर और अन्य क्षेत्रों के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, अहम पर्यटन स्थलों के अलावा एंट्री और एग्जिट पर सुरक्षा और बढ़ा दी गई है।