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77 सालों में पाकिस्तान ने PoK को खो दिया, जबकि भारत ने जम्मू-कश्मीर को बना दिया बेमिसाल

1947 से पहले कश्मीर एक बहुत बड़ी रियासत थी, जो उस समय भारत के किसी भी राज्य से बड़ी थी। इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता था। लेकिन भारत में शामिल होने से पहले पाकिस्तान समर्थित कबायलियों ने इस पर हमला कर दिया और कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया। पिछले 77 सालों से पाकिस्तान इस हिस्से पर गैरकानूनी कब्जा किए बैठा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले इस हिस्से की हालत बहुत खराब है। वहां के लोगों के पास न ठीक से पैसे हैं, न अच्छी शिक्षा की सुविधा, न ही इलाज और दूसरी जरूरी चीजें। बिजली-पानी तक ठीक से नहीं मिलता। वहीं अगर भारत के जम्मू-कश्मीर की बात करें तो वहां अब बेहतर सड़कें, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर कोई इंसान दोनों हिस्सों को जाकर देखे या उनके आंकड़े देखे तो साफ समझ में आएगा कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर को बर्बाद कर दिया है। वहां के लोग मुश्किल भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, जबकि भारत वाला हिस्सा धीरे-धीरे विकास की ओर बढ़ रहा है।

शिक्षा (पढ़ाई-लिखाई)

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पढ़ाई-लिखाई की हालत काफी खराब है। बताया जाता है कि वहां की साक्षरता दर करीब 72% है, लेकिन यह सिर्फ नाम की है और ज्यादातर लोग सिर्फ बुनियादी पढ़ाई ही कर पाते हैं। वहां स्कूल और कॉलेज बहुत कम हैं और अच्छी पढ़ाई के लिए जरूरी चीजें जैसे शिक्षक, लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाएं बहुत कम हैं। खासकर गांवों में तो हालात और भी खराब हैं। लड़कियों को तो पढ़ने का मौका तक नहीं मिल पाता।

वहीं भारत के जम्मू-कश्मीर में शिक्षा की हालत PoK से कहीं बेहतर है। 2021 तक यहां की साक्षरता दर करीब 77.3% रही है। शहरों में यह और ज्यादा है। यहां 30 से ज्यादा विश्वविद्यालय हैं और कई बड़े-बड़े संस्थान भी हैं, जैसे NIT श्रीनगर और IIM जम्मू। स्कूलों की संख्या भी अच्छी-खासी है। केंद्र सरकार की योजनाओं की वजह से अब गांवों तक भी स्कूल और पढ़ाई की सुविधाएं पहुंच रही हैं।

अर्थव्यवस्था (पैसा)

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की अर्थव्यवस्था भारत के जम्मू-कश्मीर से काफी पीछे है। PoK की प्रति व्यक्ति आय, सरकारी निवेश और आर्थिक गतिविधियां सभी J&K से बहुत कम हैं। PoK की जीडीपी 2011 के आंकड़ों के अनुसार करीब 3.2 बिलियन डॉलर थी, जो जम्मू-कश्मीर के मुकाबले बहुत कम है। वहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, वानिकी और सीमित पर्यटन पर निर्भर करती है। लोग बहुत हद तक पाकिस्तानी सेना में भर्ती होते हैं या फिर यूरोप और मध्य-पूर्व में मजदूरी करने जाते हैं। इसके अलावा, वहां की गरीबी दर 34% और बेरोजगारी दर 18.1% है, जो बहुत ज्यादा हैं। विकास के लिए पाकिस्तान सरकार का निवेश भी बहुत सीमित है।

भारत के जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था PoK से कहीं ज्यादा मजबूत है। यहां की प्रति व्यक्ति आय लगभग 1,25,000 रुपये से ज्यादा है, जो PoK से कहीं अधिक है। केंद्र सरकार के बड़े निवेश ने इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को काफी बढ़ावा दिया है। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बहुत बड़ा हाथ है, जो कुल अर्थव्यवस्था का करीब 7% हिस्सा है। इसके अलावा, बागवानी (जैसे सेब और केसर), हस्तशिल्प (जैसे कालीन और शॉल) और कृषि भी अहम हैं। जम्मू-कश्मीर में गरीबी दर 10.35% और बेरोजगारी दर 12.13% है, जो PoK के मुकाबले बहुत कम है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे में तेजी से विकास हुआ है। केंद्र सरकार की योजनाओं और विदेशी निवेश (FDI) से यहां के लोगों के लिए और ज्यादा आर्थिक मौके बने हैं।

संपत्ति (प्रॉपर्टी)

भारत के जम्मू-कश्मीर में संपत्ति के मामले में काफी बेहतर स्थिति है, खासकर शहरीकरण, बुनियादी ढांचा और निवेश के अवसरों की वजह से। वहीं, PoK में संपत्ति का बाजार काफी पिछड़ा और सीमित है। PoK में ज्यादातर जमीन कृषि और वानिकी के लिए इस्तेमाल होती है। शहरीकरण बहुत कम है और संपत्ति की कीमतें भी कम हैं। यहां का संपत्ति बाजार अस्थिर है, और आमतौर पर इस क्षेत्र में संपत्ति का निवेश भी बहुत कम है। इसके अलावा, बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और सड़क की कमी है, और ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर घर साधारण होते हैं। पाकिस्तान सरकार का नियंत्रण स्थानीय लोगों के लिए संपत्ति का मालिकाना हक हासिल करने में भी मुश्किल पैदा करता है। 

भारत के जम्मू-कश्मीर में संपत्ति की कीमतें खासतौर पर शहरी इलाकों में ज्यादा हैं, खासकर पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों की वजह से। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि सस्ती है, लेकिन बागवानी और कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहां के आवास और बुनियादी ढांचे की स्थिति PoK की तुलना में काफी बेहतर है। केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास की स्थिति को सुधारने में मदद की है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में संपत्ति बाजार में निवेश बढ़ा है, खासकर पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में।

रहन-सहन (जीवनशैली)

भारत के जम्मू-कश्मीर  में जीवनशैली PoK से कहीं बेहतर है। यहां न केवल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, बल्कि हर तरह की बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी है, जो PoK में नहीं मिलती। PoK में जीवन स्तर काफी सामान्य से नीचे है। यहां बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वास्थ्य, बिजली, और परिवहन की कमी है, जिससे लोगों की जीवनशैली बहुत साधारण रहती है। स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा भी कमजोर है, और यहां सिर्फ 23 सरकारी अस्पताल हैं। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय सहायता जैसे जर्मनी से मदद मिली है, लेकिन वह बहुत कम है। सांस्कृतिक गतिविधियां भी सीमित हैं, और क्रिकेट जैसे खेल ही लोकप्रिय हैं। कुछ स्टेडियम (मुजफ्फराबाद, न्यू मीरपुर) हैं, लेकिन वहां मीडिया का नियंत्रण और सरकार की सख्ती की वजह से सामाजिक स्वतंत्रता बहुत कम है। इसके अलावा, PoK में अक्सर मानवाधिकार उल्लंघन और पाकिस्तानी सेना के दखल की शिकायतें सामने आती हैं, और स्थानीय लोग पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी करते हैं।

भारत के जम्मू-कश्मीर में जीवन स्तर PoK से कहीं बेहतर है, खासकर शहरी इलाकों में। पर्यटन और व्यापार ने यहां की जीवनशैली को समृद्ध किया है। यहां 2,800 से ज्यादा सरकारी अस्पताल हैं, जो PoK की तुलना में कहीं अधिक हैं। AIIMS जैसे संस्थानों ने स्वास्थ्य सेवाओं को और भी बेहतर किया है। जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत बहुत समृद्ध है, जिसमें कश्मीरी, डोगरा और लद्दाखी संस्कृति शामिल हैं। यहां धार्मिक विविधता भी देखने को मिलती है। पर्यटन जगह जैसे वैष्णो देवी, अमरनाथ और गुलमर्ग ने यहां की जीवनशैली को और जीवंत बना दिया है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, और अब यहां सामाजिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति भी ज्यादा है, जो PoK की तुलना में बेहतर है।