UP News: पश्चिम बंगाल की धरती से शुरू हुआ एक नया विवाद अब दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की सियासत को गरमा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हालिया बंगाल दौरे के दौरान जो 'प्रोटोकॉल की चूक' हुई, उसने देश की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि राष्ट्रपति के आगमन पर न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद रहीं और न ही सरकार का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि, जिसके बाद खुद महामहिम ने अपनी नाराजगी जाहिर की। इस पूरे घटनाक्रम पर अब बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सीधा हमला बोला है।
मायावती ने बेहद कड़े शब्दों में इसे संवैधानिक मर्यादाओं का हनन बताया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी एक महिला और आदिवासी समाज की प्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार "अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय" है। मायावती का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने इस मुद्दे को केवल एक प्रोटोकॉल की चूक नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और संवैधानिक गरिमा से जोड़ दिया है।
अब बड़ा सस्पेंस यह है कि क्या ममता सरकार की यह 'अनदेखी' उन्हें भारी पड़ने वाली है? केंद्र की सख्ती और मायावती जैसे कद्दावर नेताओं के तीखे बयानों ने ममता बनर्जी को बैकफुट पर ला दिया है। क्या यह विवाद आने वाले चुनाव में आदिवासी वोट बैंक के समीकरण को बदल देगा? राजनीति के गलियारों में अब बस यही चर्चा है कि बंगाल सरकार की इस 'खामोशी' का अंजाम क्या होगा।