ये किसी फिल्म का दृश्य नहीं है जिसमें गांव की जिंदगी को कुछ खास अंदाज में दिखाया गया हो। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुंडल गांव की महिलाओं के लिए ये हर दिन की हकीकत है। ये महिलाएं हर दिन सुबह-सुबह पानी लाने के लिए निकल पड़ती है..ये काम इनके लिए बड़ी चुनौती से कम नही है क्योंकि गांव में पानी का जरिया सिर्फ एक अकेला हैंडपंप है।
घर में पानी की कमी पूरा करने का बोझ पूरी तरह से महिलाओं के कंधों पर है। अपने बर्तनों को पानी से भरने के लिए उन्हें हर दिन कई घंटे लग जाते हैं। साथ ही उन्हें इसके लिए पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कुंडल गांव में पानी की किल्लत का असर अब लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। उन्हें बूंद-बूंद पानी के लिए तरसता देखकर लोग इस गांव में अपनी बेटी की शादी करवाने से कतराने लगे हैं।
गांव में बेकार पड़ी पाइपलाइनों, सूखे कुओं और योजनाओं के लागू न होने की वजह से पानी को बड़े ड्रमों में इकट्ठा किया जाता है। साथ ही इन ड्रमों पर ताला भी जड़ा जाता है ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके। गांव वालों को हैंडपंप के पानी के सूखने का डर भी हमेशा सताता रहता है। कुंडल गांव के लोग कोई महंगी या शानो-शौकत दिखाने वाले चीज नहीं मांग रहे। वे सिर्फ अपनी एक बुनियादी जरूरत को पूरा करने की गुहार लगा रहे हैं। ये है- साफ और आसानी से मिलने वाला पानी।