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ऋषिकेश में गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर, घाट खाली कराए गए, SDRF और जल पुलिस अलर्ट पर

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार को ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया, जिसके बाद प्रशासन ने नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अधिकारियों के अनुसार, गंगा उफान पर है और उसका जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर चुका है। तेज बहाव को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), जल पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमों ने त्रिवेणी घाट, मुनि की रेती और लक्ष्मण झूला क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाया।

टीमों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों से घाट खाली करने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। साथ ही गंगा में स्नान न करने की सख्त चेतावनी दी गई, क्योंकि ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और बहाव बेहद खतरनाक हो गया है।

प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर राहत एवं बचाव दल तैनात किए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे जाने से बचें, प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम या आपदा राहत टीम से संपर्क करें। देहरादून, बागेश्वर और चमोली जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी-टिहरी और उत्तरकाशी के लिए भी तीन घंटे का ऑरेंज अलर्ट लागू है।

अलकनंदा, भागीरथी, मंदाकिनी, गंगा, यमुना और शारदा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर ये खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। भारी बारिश के कारण राज्य में 1,869 सड़कें बंद हो गई थीं, जिनमें से अधिकांश को खोल दिया गया है। हालांकि करीब 150 सड़कें अभी भी बंद हैं।

चारधाम यात्रा फिलहाल सुचारु रूप से जारी है। जहां भी मौसम खराब होने के कारण जोखिम बढ़ता है, वहां एहतियात के तौर पर यातायात को अस्थायी रूप से नियंत्रित किया जा रहा है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा की छह टुकड़ियां यात्रा पूरी कर लौट चुकी हैं। सातवां जत्था फिलहाल चीन में है, जबकि अन्य जत्थे नाभीढांग और टनकपुर में हैं।।