Breaking News

देहरादून: कार के सामान की दुकान में लगी आग     |   मई में भारत की इंडस्ट्रियल ग्रोथ बढ़कर 5.1 प्रतिशत हुई, अप्रैल में 4.9 फीसदी थी     |   2021 बंगाल हिंसा-हत्या केस: CBI ने आरोपी खालिद उज जमान को अरेस्ट किया     |   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 30 जून से 1 जुलाई तक आंध्र प्रदेश के दौरे पर रहेंगी     |   राजा रघुवंशी मर्डर केस में मेघायल हाई कोर्ट ने सोनम की जमानत बरकरार रखी     |  

अश्लील कंटेंट वाले ऐप्स पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, Google और Apple को जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए गूगल और एप्पल को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध कई मोबाइल ऐप्स के जरिए अश्लील और पोर्नोग्राफिक सामग्री प्रसारित की जा रही है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने Google LLC, Apple Inc. और संबंधित सरकारी अधिकारियों को मामले में उचित कार्रवाई करने और जुलाई में अगली सुनवाई से पहले कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि ऐप स्टोर चलाने वाली कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे किसी ऐप को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने से पहले उसकी जांच करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत ऐसे मध्यस्थों को पूरी सावधानी बरतनी होती है। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मोबाइल ऐप्स के माध्यम से कथित आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को तुरंत रोका जाए और आईटी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

यह जनहित याचिका रुबिका थापा नामक सामाजिक कार्यकर्ता ने दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि कई ऐप्स सोशल नेटवर्किंग और लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर अश्लील सामग्री दिखा रहे हैं। साथ ही आरोप है कि कुछ ऐप्स का इस्तेमाल कथित तौर पर मानव तस्करी, वेश्यावृत्ति, नशे के कारोबार, अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त और जबरन वसूली जैसी गतिविधियों में भी किया जा रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इन ऐप्स को संचालित करने वाली कई कंपनियां भारत के बाहर स्थित हैं और उनके सर्वर अमेरिका, तुर्की, जापान, रूस और चीन जैसे देशों में हैं, जिससे भारतीय कानूनों को लागू करना कठिन हो जाता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कई प्लेटफॉर्म आईटी नियम 2021 के तहत भारत में अनिवार्य रूप से नियुक्त किए जाने वाले अनुपालन अधिकारी और शिकायत अधिकारी नियुक्त नहीं कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि डीपफेक तकनीक के जरिए कथित ब्लैकमेल और विदेशों के माध्यम से अवैध धन लेन-देन जैसी गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं।