वरुणावत पर्वत पर जहां भूस्खलन हुआ है वह संवेदनशील क्षेत्र है। जो कि अब दोबारा सक्रिय हो गया है। इसके ट्रीटमेंट में देरी नहीं की जानी चाहिए। ट्रीटमेंट में देरी खतरे को बढ़ा सकती है। इस पर्वत पर भूस्खलन की एक बड़ी वजह मानवीय हस्तक्षेप है। पहाड़ की तलहटी को खोदने के साथ लोग अब ऊपर की तरफ बढ़ते जा रहे थे, इससे पहाड़ पर बोझ बढ़ा है। इसी वजह से भूस्खलन हुआ है।यह कहना है कि वर्ष 2003 में वरुणावत पर्वत पर हुए भूस्खलन के बाद उसके ट्रीटमेंट कार्य की अगुवाई करने वाले भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के तत्कालीन निदेशक डॉ. पीसी नवानी का। डॉ. नवानी ने 21 साल बाद वरुणावत पर दोबारा भूस्खलन होने पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस पहाड़ पर जो भी दिक्कतें आई हैं उसकी एक बड़ी वजह मानवीय हस्तक्षेप हैं।
वरुणावत पर्वत के ट्रीटमेंट में देरी पड़ सकती है भारी
You may also like
पीएम मोदी 27-28 अप्रैल को सिक्किम दौरे पर, 4000 करोड़ की परियोजनाओं की देंगे सौगात.
पंजाब किंग्स की जीत के बाद प्रीति जिंटा ने दिल्ली के हनुमान मंदिर में की पूजा.
बरेली के कॉलेज मैदान और संभल की फैक्ट्री में लगी आग, कोई जनहानि नहीं.
दिल्ली के स्कूलों में ‘पानी की घंटी’ पहल, भीषण गर्मी में बच्चों को हाइड्रेट रखने की कोशिश.