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कश्मीर में क्रिसमस की रौनक फीकी, अमेरिकी टैरिफ है सबसे बड़ी वजह

कश्मीर के पारंपरिक 'पेपर मैशे' कारीगरों के लिए इस साल त्योहारों का मौसम कुछ खास खुशियां लेकर नहीं आया। भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ की वजह से क्रिसमस की सजावट के निर्यात पर काफी असर पड़ा है। इन कारीगरों के हाथ से बनाए गए सजावटी सामान छुट्टियों के दौरान अमेरिका के घरों की शोभा बढ़ाते थे, लेकिन आज विदेशी ऑर्डरों में आई भारी गिरावट से जूझ रहे हैं।

सदियों पुरानी इस कला में माहिर पुश्तैनी कारीगरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। क्रिसमस की सजावट से जुड़ी चीजें जैसे- गेंद, तारे और चांद की सबसे ज्यादा मांग हुआ करती थी, लेकिन आज इनकी डिमांग न के बराबर है। अमेरिकी टैरिफ की वजह से पिछले साल की तुलना में मांग में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है।

त्योहारी सीजन में आई गिरावट 'पेपर मैशे' कला से जुड़े कारीगरों के लिए चिंता का सबब है। खासकर कश्मीर के उन परिवारों के लिए जो कई पीढ़ियों से इस कला के जरिए अपना गुजारा कर रहे हैं। हालांकि, पुराने ग्राहक छोटे ऑर्डर दे रहे हैं। कारीगरों को उम्मीद है कि व्यापार की बेहतर परिस्थितियां उनके पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करेंगी और उनकी आजीविका को बहाल करेंगी।