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प्रेग्नेंट महिलाएं रख सकती हैं छठ का 36 घंटे वाला व्रत? क्या मां-बच्चे को हो सकता है खतरा

छठ पूजा, विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में, एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। यह पूजा सूर्य देवता की उपासना के रूप में होती है, जिसमें भक्त 36 घंटे का कठिन व्रत रखते हैं। इस दौरान महिलाएं न केवल उपवास करती हैं, बल्कि नदी या तालाब में स्नान और सूर्य अर्चना भी करती हैं। छठ पूजा में यह व्रत बहुत ही कठोर होता है, और इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए इसे निभाना एक बड़ा सवाल बन जाता है।

क्या प्रेग्नेंसी में छठ का व्रत रखना सुरक्षित है?
गर्भवती महिलाओं के लिए छठ का व्रत रखना सेहत के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान 36 घंटे का उपवास और शारीरिक मेहनत शरीर पर अत्यधिक तनाव डाल सकते हैं। इस प्रकार के व्रत को रखते समय कई संभावित जोखिम हो सकते हैं, जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए छठ के व्रत के संभावित खतरे
न्यूट्रिशनल डिफिसियेंसी (पोषक तत्वों की कमी): प्रेग्नेंसी में महिला का शरीर अतिरिक्त पोषक तत्वों की मांग करता है, जिससे भ्रूण का सही विकास हो सके। 36 घंटे का उपवास करने से महिला को आवश्यक कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है। इससे हाइपोग्लाइसीमिया (रक्त शर्करा का स्तर गिरना), कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह भ्रूण के विकास के लिए भी हानिकारक हो सकता है।

हाइड्रेशन की कमी: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। छठ व्रत के दौरान पानी न पीने से डेहाइड्रेशन (जल की कमी) हो सकता है, जो महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे मांसपेशियों में ऐंठन, थकावट, सिरदर्द, और यहां तक कि प्रसवपूर्व समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

मां-बच्चे के लिए शारीरिक तनाव: गर्भवती महिलाओं का शरीर पहले से ही बढ़े हुए वजन, हार्मोनल बदलाव, और बढ़ते गर्भ के कारण तनाव में होता है। 36 घंटे का उपवास और शारीरिक गतिविधि जैसे पूजा स्थल तक जाना, लंबा खड़ा रहना, और सूर्य अर्चना करना शारीरिक रूप से अत्यधिक थकाऊ हो सकता है। इससे उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, चक्कर आना, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

हाई रिस्ट प्रेगनेंसी में जोखिम: यदि महिला पहले से ही किसी जटिल स्थिति (जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, प्री-एक्लेमप्सिया, या मल्टीपल प्रेगनेंसी) से गुजर रही है, तो ऐसे व्रत करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना और इस तरह के कठिन व्रत से बचना चाहिए।

प्राकृतिक जलवायु और मौसम के असर: छठ पूजा के दौरान, महिलाओं को आमतौर पर सर्दी या गर्मी जैसी जलवायु परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, खासकर जब वे जलाशयों में स्नान करती हैं या देर तक खड़ी रहती हैं। यह स्थिति गर्भवती महिलाओं के लिए खासतौर पर खतरनाक हो सकती है, क्योंकि वे आसानी से बुखार या सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं का शिकार हो सकती हैं, जो भ्रूण के लिए भी जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।

गर्भवती महिलाएं छठ का व्रत रखें तो क्या सावधानियां बरतें?
अगर गर्भवती महिला छठ पूजा का व्रत रखने की इच्छुक हैं, तो उन्हें निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना चाहिए:

डॉक्टर से सलाह लें: व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। यदि आपकी प्रेगनेंसी सामान्य है, तो डॉक्टर आपको कुछ संशोधन के साथ व्रत रखने की सलाह दे सकते हैं, लेकिन यदि आपकी प्रेगनेंसी में कोई जटिलताएं हैं, तो व्रत से बचना सबसे अच्छा होगा।

उपवास में बदलाव करें: अगर पूरी तरह से 36 घंटे का उपवास रखना मुश्किल हो, तो उसे कम से कम समय के लिए उपवास में बदलें। आप हल्का फलाहार (जैसे केला, सेब, या नारियल पानी) ले सकती हैं, ताकि शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिल सके।

पानी का सेवन करें: उपवास के दौरान हाइड्रेशन का खास ध्यान रखें। पानी, नारियल पानी, या सेहतमंद जूस पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है।

लंबा समय खड़ा होने से बचें: पूजा के दौरान ज्यादा देर तक खड़ा होने से बचें। थकान और कमजोरी से बचने के लिए आप आराम से बैठ सकती हैं।

स्नान में सावधानी रखें: नदी या तालाब में स्नान करते समय ध्यान रखें कि आप अधिक देर तक ठंडे पानी में न रहें। इससे शरीर का तापमान गड़बड़ हो सकता है, जो गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

व्रत में बदलाव करें: आप यदि पूरी तरह व्रत रखने की बजाय सात्विक आहार (हल्का फल, दूध, या हल्का भोजन) ग्रहण कर सकती हैं, तो इससे आपका शरीर ताजगी महसूस करेगा और आप मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित रहेंगी।

छठ पूजा एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इस 36 घंटे के कठिन व्रत को रखना सेहत के लिहाज से जोखिमपूर्ण हो सकता है। हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है, और इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें और व्रत के दौरान अपनी सेहत और बच्चे का ध्यान रखें। सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए, आप छठ पूजा के अन्य धार्मिक कार्यों को आराम से पूरा कर सकती हैं।