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ममता बनर्जी के आवास पहुंची CID टीम, कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच तेज

पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (CID) की एक टीम तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पहुंची। हालांकि, ममता बनर्जी फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हैं, जहां उन्होंने हाल ही में INDIA गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया था। यह कार्रवाई कथित हस्ताक्षर जालसाजी (सिग्नेचर फोर्जरी) मामले की जांच के तहत की गई है। इससे पहले पिछले सप्ताह CID की टीम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास भी पहुंची थी।

मामले की जांच के लिए राज्य CID ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच दल का नेतृत्व पश्चिम बंगाल पुलिस के एक डीआईजी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। CID ने अभिषेक बनर्जी से पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित वह मूल प्रस्ताव (रिजॉल्यूशन) प्रस्तुत करने को कहा है, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। अभिषेक बनर्जी ने अपने कानूनी सलाहकार के माध्यम से एजेंसी को औपचारिक जवाब भेज दिया है।

जांच के दौरान CID अब तक 13 तृणमूल कांग्रेस विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, तीन विधायकों ने दावा किया है कि 6 मई की बैठक के प्रस्ताव पत्र में दर्ज हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। वहीं, कैनिंग पूर्व से विधायक ने यह भी कहा कि वह कोलकाता में आयोजित उस बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे।

जांच एजेंसी ने बाद में अभिषेक बनर्जी को मूल बैठक प्रस्ताव पुस्तिका के साथ जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा। दरअसल, 9 मई को अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया था कि पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) विधायक दल की बैठक में लिया गया था। इसके बाद 18 मई को विधानसभा के प्रधान सचिव ने उनसे बैठक की कार्यवाही, प्रस्ताव और उपस्थित विधायकों के हस्ताक्षरों की प्रतियां मांगी थीं।

20 मई को अभिषेक बनर्जी ने बैठक प्रस्ताव पुस्तिका की प्रति और उपस्थिति पत्रक जमा किया था, जिसमें दावा किया गया था कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक उपस्थित थे। हालांकि, 27 मई को AITC के दो विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत कर आरोप लगाया कि 6 मई को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के चयन को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था और उन्होंने प्रस्ताव पुस्तिका पर हस्ताक्षर 19 मई को किए थे।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि 6 मई का प्रस्ताव “गढ़ा हुआ और फर्जी” है तथा उसमें मौजूद 14 हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में लिखे गए हैं। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने दोनों विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था।विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के आधार पर 27 मई को हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 28 मई को CID ने जांच अपने हाथ में ले ली। जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।