Breaking News

छत्तीसगढ़ के सूरजपूर में तेजी बारिश में बहा पुल, 10 करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण     |   वाराणसी एयरपोर्ट पर यात्री की पिस्टल से चली गोली, 2 घायल     |   तमिलनाडु के थूथुकुडी-पालयमकोट्टई रोड पर स्थित एक प्राइवेट टू-व्हीलर शोरूम में लगी आग     |   हाथरस: सिकंदराराऊ इलाके में GT रोड पर हादसा, नोएडा की ओर आ रही कार अनियंत्रित होकर पलटी     |   मंगलुरु: BJP नेता ने सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, वंदे मातरम् के आपमान का लगाया आरोप     |  

क्या हिंदू क्या मुस्लिम…अपने पितरों को सभी करते हैं याद

यह सितंबर 2001 की बात है. कोलकाता में पूरे हेस्टिंग रोड पर पानी भरा हुआ था. हुगली का पानी उछल-उछल कर बड़ा बाजार की गलियों को अपने घेरे में ले रहा था. वे श्राद्धों के दिन थे. एक दिन अलीपुर स्थित अपने आवास से बीके पॉल एवेन्यू के अपने दफ्तर आते हुए मुझे असंख्य औरतें दिखीं जो साड़ी कमर में खोंसे इस पानी के बीच खड़ी बादलों से ढके सूर्य को जल अर्पण कर रही थीं. मैंने अपने ओड़िया ड्राइवर से पूछा, यह क्या हो रहा है. उसने बताया, ये लोग अपने पितरों का तर्पण कर रहे हैं. तब तक उत्तर भारत में स्त्रियां पितर तर्पण नहीं करती थीं. लेकिन बंगाल में पुरुष सत्ता इतनी प्रभावी कभी नहीं रही. वहां स्त्रियां पहले से पितर तर्पण करती आ रही हैं. उत्तर में तो अभी भी इस तरह के दृश्य आम नहीं हैं. वे महिलाएं कोई बिहार या यूपी की नहीं थीं बल्कि विशुद्ध बंगाली थीं.