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शुरू हो गई पशु जनगणना, पहली बार मोबाइल ऐप से होगी गिनती, आवारा पशु भी शामिल

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने पशुधन-गणना और महामारी निधि परियोजना की शुरुआत कर दी है। अगले साल फरवरी तक चलने वाली इस पशुधन-गणना पर केंद्र सरकार लगभग 450  करोड़ रुपये खर्च कर रही है। 16 प्रजातियों की 219 नस्लें पशुधन-गणना में होंगी शामिल।

इस अवसर पर, महामारी की तैयारी और भारत में पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 200 करोड़ रुपये) की 'महामारी निधि परियोजना' भी शुरू की गई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सटीक डाटा की उपलब्धता से सरकार को पशुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और पशुपालन क्षेत्र में उच्च विकास हासिल करने के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।

अक्तूबर से अगले साल फरवरी तक चलेगी पशुधन-गणना 
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अगले साल फरवरी तक चलने वाली इस पशुधन-गणना पर केंद्र सरकार 200 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जिसकी लागत पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी। 21वीं पशुधन जनगणना अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान आयोजित की जाएगी। राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित लॉन्चिंग कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, इस पशुधन जनगणना को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ आयोजित करने पर जोर दिया है। उन्होंने अपने मंत्रालय के अधिकारियों से इस जनगणना अभियान की नियमित रूप से निगरानी करने को भी कहा है। उन्होंने बताया कि जनगणना की रिपोर्ट अगले साल आएगी।

16 प्रजातियों की 219 नस्लों के आंकड़े किए जाएंगे एकत्र 
अखिल भारतीय स्तर पर, लगभग एक लाख क्षेत्रीय अधिकारी जो ज्यादातर पशु चिकित्सक या पैरा-पशु चिकित्सक हैं, गणना प्रक्रिया में शामिल होंगे। गणना में 16 प्रजातियों की 219 देशी नस्लों के आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। जनगणना में पशुधन की प्रजातियों - मवेशी, भैंस, मिथुन, याक, भेड़, बकरी, सुअर, ऊँट, घोड़ा, टट्टू, खच्चर, गधा, कुत्ता, खरगोश और हाथी - पर डेटा एकत्र किया जाएगा। पशुधन के अलावा, पोल्ट्री पक्षियों - मुर्गी, बत्तख, टर्की, गीज़, बटेर, गिनी मुर्गी, शुतुरमुर्ग और एमु की गिनती भी प्रत्येक परिवार, घरेलू या गैर-घरेलू उद्यमों और संस्थाओं से की जाएगी। इन प्रजातियों को ICAR-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBAGR) द्वारा मान्यता प्राप्त है।

डाटा संग्रह के लिए मोबाइल तकनीक का उपयोग
नवीनतम जनगणना में डाटा संग्रह और प्रसारण के लिए मोबाइल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे देश के सभी गांवों और शहरी वार्डों में डाटा संग्रह की सटीकता और दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे आंकड़े बहुत सटीक आएंगे, जिसका फायदा ये होगा कि डेयरी प्रोडक्ट की एक्सपोर्ट पॉलिसी और पशुओं की बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए बनने वाली योजनाओं के लिए रास्ता आसान हो जाएगा. विशेष रूप से, यह देश की पहली जनगणना होगी, जिसमें पशुपालकों द्वारा पशुधन रखने के बारे में डाटा स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होगा। 

यह पशुधन जनगणना "पशुपालन में मुख्य रूप से शामिल व्यक्ति के लिंग" के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएगी।

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक होने के बावजूद, भारत दूध और अन्य डेयरी उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि जनगणना से पशुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी।

पशुजनगणना के बारे में कुछ और खास बातें 
1. साल 2025 में 21वीं पशुजनगणना के आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे. 
2. पशुजनगणना पर लगभग 450  करोड़ रुपये खर्च होंगे. 
3. करीब एक लाख लोग देशभर में पशुजनगणना करेंगे. 
4. 25 अक्टूबर से 25 फरवरी 2025 तक पशुजनगणना होगी. 
5. गाय की 53 नस्लों की गिनती की जाएगी. 
6. भैंस की 20 नस्लों की गिनती की जाएगी.
7. भेड़ की 45 नस्लों की गिनती की जाएगी.
8. बकरी की 39 नस्लों की गिनती की जाएगी.
9. घोड़ों की आठ नस्लों की गिनती की जाएगी.
10. गधों की तीन नस्लों की गिनती की जाएगी.
11. सूअर की 14 नस्लों की गिनती की जाएगी.
12. कुत्तों की तीन नस्लों की गिनती की जाएगी.
13. मुर्गे की 20 नस्लों की गिनती की जाएगी.
14. बत्तख की तीन नस्लों की गिनती की जाएगी.
15. मेल और फीमेल के आधार पर गिनती होगी. 
16. जुलाई से लेकर नौ अगस्त तक सभी राज्यों को ट्रेनिंग दी गई है. 
17. छुट्टा गाय पहली बार गणना में शामिल होंगी. 
18. स्ट्रीट डॉग को भी पहली बार गणना में शामिल किया गया है.