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अहमदाबाद सिविल अस्पताल का आई बैंक, नेत्रदान से नई रोशनी

गुजरात का अहमदाबाद सिविल अस्पताल एशिया का सबसे बड़ा सिविल अस्पताल माना जाता है। इसी अस्पताल में बने आई बैंक को हर साल औसतन करीब 300 आंखें दान में मिलती हैं। साल 2025 में यहां 304 आंखें डोनेट की गईं। इनमें से 95 मरीजों की सफल सर्जरी की गई, जबकि 186 आंखों को रिसर्च के लिए भेजा गया। ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि ये उन जिंदगियों की कहानी है, जिन्हें अंधकार से निकलकर नई रोशनी मिली है।

नेत्रदान के इस कार्य में गुजरात सरकार के स्वास्थ्य विभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहां नियमित रूप से चक्षु पखवाड़ा मनाया जाता है। नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए अहमदाबाद सिविल अस्पताल में तीन कांउसलर्स की भी नियुक्ति की गई है। इस संवेदनशील कार्य में काउंसलर्स की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शोक में डूबे परिजनों को मानवीय तरीके से समझाते हैं कि उनके अपने की आंखें किसी और की दुनिया रोशन कर सकती हैं। नेत्रदान के बाद आई बैंक में आंखों को सुरक्षित तरीके से रखने के लिए आधुनिक तकनीक से सुसज्जित सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं। खास बात है कि यहां लैमिनार एयर फ्लो जैसी व्यवस्था भी की गई है, जिससे स्वच्छ वातावरण में छोटे ऑपरेशंस भी संभव हो पाते हैं। कुछ ऐसा ही गांधीनगर सिविल परिसर में स्थित जुसिका संस्थान भी कर रही है। दान में मिली आंखों को लेने के बाद उसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल के आई बैंक में भेज दिया जाता है। हमारी आंखें, हमारे बाद भी किसी और की दुनिया रोशन कर सकती हैं।