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Mayday, Mayday, Mayday... जानें क्या होता है पायलट द्वारा दिए गए इस संदेश का प्रोटोकॉल?

Gujarat: अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन जा रहा एअर इंडिया का विमान गुरुवार दोपहर उड़ान भरने के फौरन बाद हादसे का शिकार हो गया। विमान में 242 लोग सवार थे। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान अचानक मेडिकल कॉलेज परिसर में गिर गया। विस्फोट के साथ काले धुएं का घना गुबार उठा और तत्काल आपातकालीन क्रियाकलाप शुरू हो गए।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मुताबिक हादसे के कुछ सेकंड पहले पायलट ने पूरी आपात स्थिति के लिए तय मेडे डिस्ट्रेस कॉल जारी किया था। जवाब में एयर ट्रैफिक कंट्रोल के कॉल पर विमान से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। 'मेडे' शब्द फ्रेंच भाषा का है। इसका मतलब है 'मेरी मदद करो'।

जब कोई पायलट मेडे कॉल जारी करता है, तो वो 'मेडे' शब्द को तीन बार दोहराता है। उसके बाद मुख्य विवरण देता है। जैसे, संकेत, जगह, आपात स्थिति की प्रकृति और विमान में सवार लोगों की संख्या। एयर ट्रैफिक कंट्रोल और आस-पास के दूसरे विमानों को सचेत किया जाता है कि तत्काल सहायता की जरूरत है। पायलट इंजन में खराबी, आग लगने या दूसरे गंभीर हादसे की स्थिति में 'मेडे' कॉल प्रसारित करता है, जिनसे यात्रियों और विमान की सुरक्षा को खतरा हो।

जब एयर ट्रैफिक कंट्रोल को 'मेडे' कॉल मिलता है तो उसे सारे गैरजरूरी रेडियो संचार फौरन बंद कर देने चाहिए और डिस्ट्रेस कॉल पर पूरा ध्यान देना चाहिए। हादसे की वजह जानने के लिए जांच की जा रही है। फिर भी पायलट का 'मेडे' कॉल साफ बताता है कि ऐसी आपात स्थिति में एक-एक सेकेंड कितना महत्वपूर्ण है।