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J-K: पुलवामा आतंकी हमले के सात साल पूरे, अब तक भरे नहीं हैं शूरवीरों को खोने के जख्म

Jammu Kashmir: 14 फरवरी, 2019... दिन- गुरुवार। इसे भारत कभी नहीं भूलेगा। उस दिन दोपहर तीन बजे के कुछ देर बाद, जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के लेथपोरा गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक से भरी गाड़ी से टक्कर मार दी, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए।

उस आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर भी, उन बहादुर सीआरपीएफ जवानों की यादें ताजा हैं। इस मौके पर लेथपोरा में 185 सीआरपीएफ बटालियन में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। कश्मीर क्षेत्र के पुलिस महानिदेशक वी.के. बिरदी और सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने उन लोगों को याद किया जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।

जम्मू में बलिदान स्तंभ पर भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्यों ने शहीदों को याद किया। पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले शहीदों में पंजाब के मोगा के गालौटी के रहने वाले जयमल सिंह भी थे, जो काफिले की एक गाड़ी चला रहे थे। उनका परिवार आज भी उस नुकसान का दर्द झेल रहा है।

पुलवामा आतंकी हमले ने देश को हिलाकर रख दिया था, लेकिन देश ने उन 40 CRPF जवानों के बलिदान से हिम्मत जुटाने का फैसला किया। इसलिए, हर साल 14 फरवरी को उन बहादुर शहीद जवानों को नमन किया जाता है, जिन्होंने वतन की हिफाजत के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।