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चौहान वंश के इस राजा ने 13 साल की उम्र में ही अजमेर की गद्दी संभाली, बचपन से ही तलवारबाजी का था शौक

पृथ्वीराज चौहान महान राजा

पृथ्वीराज चौहान ' चौहान' वंश के महान क्षत्रिय राजा थे। साल 1166 में इनका जन्म अजमेर के राजा सोमेश्वप चौहान के घर हुआ। पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही समझदार थे। पृथ्वीराज चौहान जब 13 साल के थे तो इनके पिता की मृत्यु हो गई थी।
पृथ्वीराज चौहान ने 13 साल की उम्र में ही अजमेर की गद्दी संभाली थी।  

बचपन से ही पसंद था तीर और तलवार चलाना

बचपन से ही पृथ्वीराज चौहान समझदार और एक कुशल योद्धा भी थे। पृथ्वीराज चौहान के दादा ने जब अपने पोते के बारे में ये सारी बातें सुनी तो वे बहुत खुश हुए। जिसके बाद उन्होने पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली की गद्दी पर बिठा दिया। पृथ्वीराज चौहान बहुत ज्ञानी थे, इन्हें कुल छः भाषाओं का ज्ञान था। इसमें संस्कृत, प्राकृत, मागधी, पैशाची, शौरसेनी और अपभ्रंश भाषा है। इन्हें गणित, इतिहास और चिकित्सा शास्त्र का भी ज्ञान था। इनकी बहुत बड़ी सेना थी, इनकी सेना में करीब 300 हाथी और 3,00,000 सैनिक थे। राजा पृथ्वीराज चौहान का राज्य हरियाणा से राजस्थान तक फैला हुआ था। पृथ्वीराज चौहान को बचपन से ही तीरबाजी और तलवार चलाना पसंद था। 

राजा जयचंद की बेटी से हुआ था प्रेम

पृथ्वीराज चौहान को कन्नौज के राजा जयचंद की बेटी संयोगिता से प्रेम हुआ था। पृथ्वीराज चौहान ने संयोगिता को स्वयंवर से ही अपने साथ ले गए थे। पृथ्वीराज चौहान के ससुर यानी राजा जयचंद की इनसे नही बनती थी। राजा जयचंद अपनी बेटी संयोगिता का विवाह पृथ्वीराज चौहान से कराने के लिए बिल्कुल राजी नहीं थे। पृथ्वीराज चौहान को राजा जयचंद ने अपना दुशमन मान लिया था।

पृथ्वीराज चौहान को अंधा कर दिया

सुल्तान मुहम्मद गौरी ने कई बार पृथ्वीराज चौहान को हराने की कोशिश करी पर वे हर बार असफल होते थे। पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गौरी को 17 बार हराया और हर बार उनकी जान को बख्श देते थे। मुहम्मद गौरी ने 18 बार पृथ्वीराज चौहान पर हमला करा और इसमें उन्होंने पृथ्वीराज चौहान के ससुर की मदद ली। अंत में पृथ्वीराज चौहान हार गए और मुहम्मद गौरी ने उन्हें बंदी  बना लिया। मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को सजा के तौर पर उन्हें अंधा कर दिया।

मुहम्मद गौरी का अंत

जब पृथ्वीराज चौहान को मुहम्मद गौरी ने बंदी बनाया तो इनके बचपन के दोस्त चंदबरदाई भी वही मौजूद थे। मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान के दोस्त को कहा की इनकी आखिरी इच्छा पूरी करे। पृथ्वीराज चौहान ने अपनी कला दिखाने की इच्छा जताई। जिसके बाद उन्होंने धनुष-बाण उठा लिया। पृथ्वीराज चौहान के दोस्त चंदबरदाई कवि थे। उन्होंने मुहम्मद गौरी को देखते हुए एक दोहा कहा-'चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान'। पृथ्वीराज चौहान के दोस्त शब्दों का बाण चलाने में माहिर थे। पृथ्वीराज चौहान ने अपने दोस्त की मदद से मुहम्मद गौरी को मार गिराया। जिसके बाद उन्होंने खुद को और चदंबरदाई को दुर्गति से बचने के लिए एक दूसरे को मार दिया। यह खबर सुनते ही पृथ्वीराज चौहान की पत्नी ने अपनी जान दे दी।