आगरा स्थित ताजमहल को पूरी दुनिया शाहजहां की मुमताज के प्रति मोहब्बत की मिसाल मानती है। लेकिन इसके पीछे का एक रहस्य सालों से लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वास्तव में ताजमहल एक प्राचीन शिव मंदिर "तेजोमहालय" था?
इतिहासकार पी. एन. ओक और कई शोधकर्ताओं का दावा है कि ताजमहल से पहले उस स्थान पर एक भव्य शिव मंदिर था। उनके अनुसार, ताजमहल की बनावट, संगमरमर की दीवारों पर बने कमल के फूल और कुछ खास चिन्ह यह संकेत देते हैं कि यह जगह पहले हिंदू मंदिर थी। उनका यह भी मानना है कि शाहजहां ने उस मंदिर को अपने कब्जे में लेकर उसमें कुछ बदलाव किए और फिर उसे मुमताज की याद में एक मकबरे के रूप में प्रस्तुत किया।
साल 2022 में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें ताजमहल के नीचे बंद कमरों को खोलने की मांग की गई थी। याचिका देने वाले का कहना था कि इन कमरों में हिंदू धर्म से जुड़े कई चिन्ह और मूर्तियां हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी, लेकिन इसके बाद इस विषय पर काफी चर्चा शुरू हो गई।
ताजमहल के एक स्थानीय गाइड ने बताया, "हमने खुद उन दरवाजों को देखा है जो बहुत सालों से बंद हैं। अब तक यह एक रहस्य है, क्योंकि किसी को नहीं पता कि उन दरवाजों के पीछे क्या है।"
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन दावों की जांच की है, लेकिन रहस्य अब भी बरकरार है। लोगों की नजर में ताजमहल सिर्फ एक प्रेम की निशानी है, लेकिन जब तक वे बंद दरवाजे नहीं खुलते, यह स्मारक प्रेम की निशानी के साथ-साथ भारत के इतिहास का एक अनसुलझा रहस्य भी बना रहेगा।