Breaking News

ईरान के साथ 'बड़ी डील' करीब, कल खत्म हो रहा सीजफायर नहीं बढ़ेगा: डोनाल्ड ट्रंप     |   केरल: त्रिशूर के पटाखा गोदाम में आग, अब तक 8 लोगों की मौत     |   MP: 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चर्चा     |   अमेरिका और ईरान ने संकेत दिया कि वे सीजफायर वार्ता के लिए पाकिस्तान जाएंगे     |   ईरान का कोई डेलिगेशन बातचीत के लिए अब तक पाकिस्तान नहीं पहुंचा     |  

मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद के प्रस्तावित विशेष सत्र को लेकर PM मोदी को लिखा पत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की संसद में होने जा रही ऐतिहासिक चर्चा से पहले सभी सांसदों को पत्र लिखकर व्यापक समर्थन और एकजुटता का आह्वान किया है. यह चर्चा 16 अप्रैल से संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित है. प्रधानमंत्री ने इसे लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कहा है कि राज्यों में चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना इस धारणा को बल देता है कि सरकार 'राजनीतिक लाभ' के लिए महिला आरक्षण कानून को लागू करने में जल्दबाजी कर रही है. प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने इस मांग को दोहराया कि परिसीमन मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. इस परिसीमन को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों से जोड़ा जा रहा है.

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था. उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से मैंने मांग की थी कि यह महत्वपूर्ण कानून तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए." कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इसके तत्काल कार्यान्वयन के लिए व्यापक सहमति थी, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे लागू नहीं किया. उन्होंने कहा, "तब से 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष बैठक बुलाई गई है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है. आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर कोई सार्थक चर्चा करना असंभव होगा." 

प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में कहा है कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को आगे बढ़ने, नेतृत्व करने और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का समान अवसर मिले. विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि नारी शक्ति अपनी पूरी क्षमता और भागीदारी के साथ इस यात्रा का हिस्सा बने. उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की बेटियां आज अंतरिक्ष, खेल, सशस्त्र बलों, स्टार्ट-अप्स और सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. उनकी सोच, मेहनत और संकल्प देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं.

पीएम मोदी ने याद दिलाया कि साल 2023 में संसद में सभी दलों के सांसदों ने एक स्वर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था. यह क्षण भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में अविस्मरणीय रहा, जब सामूहिक इच्छाशक्ति से महिला आरक्षण को स्वीकृति दी गई. नारी शक्ति देश की जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा है, और राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है.

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि अधिनियम पर चर्चा के दौरान इसे लागू करने के समय को लेकर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ था. सभी दलों की सहमति से यह विचार सामने आया था कि कानून के प्रावधानों को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए. इस दिशा में संविधान विशेषज्ञों, जानकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद किया गया. 

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि गहन मंथन के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अब उसकी पूर्ण भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने प्रस्ताव रखा कि 2029 के लोकसभा चुनाव और सभी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण पूरी तरह लागू होने के बाद कराए जाएं. इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा आएगी, जनविश्वास मजबूत होगा और शासन में समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से अपील की कि वे इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट हों और अधिक से अधिक सदस्य संसद में अपने विचार रखें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है और आने वाली पीढ़ियों के प्रति देश की जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है. पत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद एकजुट होकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करेगी और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने वाले सांसद इस योगदान पर सदैव गर्व महसूस करेंगे. उन्होंने इसे देश की माताओं, बहनों और बेटियों के प्रति दायित्वों के निर्वहन का अवसर बताया.