सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के एक दिन बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में बने अवैध पांच मंजिला भवनों को तुरंत सील करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने यह फैसला शहर में इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाने के तहत लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार सुबह दोबारा घटनास्थल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था और जारी राहत-बचाव अभियान का जायजा लिया। इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। वहीं, लापरवाही पाए जाने पर एमसीडी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने आसपास के पीजी और अन्य भवनों की गहन जांच के भी निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित इमारतों को सील किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्लीवासियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास की इमारतों को सहारा देने के लिए लोहे के जैक भी लगाए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार एमसीडी के साथ मिलकर ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली अन्य इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा। सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने वाली इमारतों में ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
इमारत गिरने की वजह पर मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 80 फीसदी मलबा हटाया जा चुका है और अब बेसमेंट का मलबा बाकी है। बेसमेंट में पानी जमा होने और पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत कार्य को हादसे की संभावित वजह बताया गया है। अब तक 12 लोगों को मलबे से निकाला गया है, जिनमें 6 की मौत हो चुकी है और बाकी 6 की हालत स्थिर बताई गई है।
इससे पहले रविवार को एमसीडी ने सत्या निकेतन की प्रॉपर्टी नंबर 13 को तीन दिन के भीतर गिराने का आदेश दिया था। एमसीडी ने इमारत को जर्जर और खतरनाक बताते हुए कहा था कि इससे वहां रहने वाले लोगों और आसपास के लोगों की जान को खतरा था। हादसे के बाद इलाके में रहने वाले छात्र भी डरे हुए हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा प्राशिका वर्मा ने बताया कि कई छात्र डर के कारण अपने रिश्तेदारों के घर जा रहे हैं। कुछ छात्र कॉलेजों में भी शरण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी आंखों के सामने इमारत को गिरते देखा, जिससे उनमें डर और तनाव का माहौल है। वहीं, NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने राहत-बचाव अभियान में कथित लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने घटना से निपटने की प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन, उपकरण और उचित रेस्क्यू टीम की कमी के कारण व्यवस्था विफल रही।