संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स Meta, X, Snapchat और Google के प्रतिनिधियों को सोमवार को शाम 4 बजे समिति के सामने पेश होने के लिए तलब किया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी और संचार समिति की बैठक में ऑनलाइन सुरक्षा के व्यापक ढांचे की समीक्षा की जाएगी। बैठक में मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, किसानों, ग्रामीणों, मजदूरों और आम नागरिकों के डेटा की गोपनीयता की सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा कानून-व्यवस्था से जुड़े सरकारी नियमों के पालन पर चर्चा होगी।
भाजपा सांसद और संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया कंपनियों को तलब किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि 3 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे समिति ने Meta (Instagram, Facebook और WhatsApp), X (Twitter), Snapchat और Google के प्रतिनिधियों को बुलाया है।
निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति यह जानना चाहती है कि महिलाओं, बच्चों, किसानों, ग्रामीणों, मजदूरों और आम नागरिकों की निजता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि ये कंपनियां सरकार के कानून और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का किस तरह पालन करती हैं। यह घटनाक्रम Meta से जुड़ी एक घटना के बाद सामने आया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परीक्षा में पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर Facebook पर जारी एक वीडियो को कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। हालांकि, बाद में वीडियो को बहाल कर दिया गया।
Meta के प्रवक्ता ने बयान में कहा था कि वीडियो गलती से हटा दिया गया था और अब इसे दोबारा बहाल कर दिया गया है। कंपनी ने वीडियो हटाए जाने को तकनीकी गलती बताया था। 23 जुलाई को जारी किया गया यह वीडियो NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर 36 दिनों तक चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Gen Z को पहला सीधा संबोधन था।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करेगी। उन्होंने स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और नए कानून के जरिए सख्त सजा का प्रावधान करने की बात कही थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसमें कानून के तहत होने वाले अपराधों के लिए 10 साल तक की सजा, अधिक जुर्माना और मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
NEET-UG 2026 में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ समझौता किया। इसके तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, पुलिस की ओर से कथित डराने-धमकाने की कार्रवाई रोकने और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने पर सहमति बनी थी।