Breaking News

पीएम मोदी इजरायल की संसद पहुंचे, कुछ देर में संबोधन     |   दिल्ली में आज अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया     |   राज्यसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी, 5 मार्च नामांकन की आखिरी तारीख     |   अबकी बार किसके कहने पर इजरायल गए PM मोदी: राहुल गांधी     |   योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिं​ह ने BSP विधायक उमाशंकर सिंह पर IT रेड का किया विरोध     |  

केरल हुआ 'केरलम', कब बदलेगा दिल्ली का भी नाम? BJP सांसद ने केंद्र को भेजा प्रस्ताव

केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय के बाद एक बार फिर दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने की मांग तेज हो गई है। दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ऐसा कदम भारत की राजधानी की ऐतिहासिक और सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली में किसी उपयुक्त स्थान पर संभवतः पुराना किला में पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, जिससे दिल्ली की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित किया जा सके। 

खंडेलवाल ने एक अलग पत्र में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी अनुरोध किया है कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली का नाम “इंद्रप्रस्थ” करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र में खंडेलवाल ने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और उसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम भी उसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और दीर्घकालिक सभ्यतागत परंपराएं यह स्थापित करती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल है, जो पांडवों द्वारा स्थापित भव्य राजधानी थी, जैसा कि महाकाव्य महाभारत में वर्णित है।

महाभारत में इंद्रप्रस्थ को यमुना नदी के तट पर बसा एक समृद्ध और भव्य नगर बताया गया है, जो आज की दिल्ली के भौगोलिक स्वरूप से पूरी तरह मेल खाता है। उन्होंने आगे बताया कि पुरातत्व सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं, जिनमें पेंटेड ग्रे वेयर संस्कृति के अवशेष भी शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये खोजें इस ऐतिहासिक धारणा को मजबूत करती हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ इसी स्थान पर स्थित था जहां आज दिल्ली है।

खंडेलवाल ने कहा कि 'दिल्ली' नाम अपेक्षाकृत बाद के मध्यकालीन दौर में प्रचलन में आया, जिसे इतिहासकार ढिल्लिका या देहली जैसे नामों से जोड़ते हैं। लेकिन यह इसकी मूल और प्राचीन सभ्यतागत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने कहा, इंद्रप्रस्थ राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है, जबकि दिल्ली इतिहास के एक बाद के चरण को दर्शाता है। राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की प्राचीन विरासत से उसके संबंध को पुनर्स्थापित करेगा और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करेगा।

खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भारत में कई शहरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज प्रमुख उदाहरण हैं। वहीं, इंद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों में प्रचलित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस ऐतिहासिक नाम को समाज में स्वाभाविक स्वीकृति प्राप्त है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया कि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य विशेषज्ञों से परामर्श कर इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाए।