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दिल से कैनवास तक: रंगों में सजी विशेष प्रतिभाओं की कहानी

बरेली कुछ कहानियाँ शब्दों से नहीं, बल्कि रंगों और रचनात्मकता से लिखी जाती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी बरेली के आशा स्कूल में "दिल से कैनवास तक" कार्यक्रम के रूप में उभरकर सामने आई। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन बच्चों की कल्पनाओं और भावनाओं की झलक थी, जो अपनी रचनात्मकता के माध्यम से दुनिया को देखने और दिखाने की नई राह बना रहे हैं।

एक अनोखी पहल, अनगिनत सपने
इस विशेष आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि विशेष रूप से सक्षम बच्चों को उनकी कला के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का अवसर देना था। पंचशूल गनर्स ने द टाइम्स ऑफ इंडिया और फोकस नेत्रालय के सहयोग से इस पहल को साकार किया, जहाँ बच्चों को चित्रकला, शिल्प निर्माण और खेलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।

जब रंगों ने कहानियाँ लिखीं
कार्यक्रम में 23 विद्यार्थियों ने पूरे जोश और उत्साह के साथ भाग लिया। किसी ने अपनी कल्पना को कैनवास पर उकेरा, तो किसी ने रंगों के माध्यम से अपनी अनकही भावनाओं को व्यक्त किया। उनकी मेहनत और उत्साह को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए, जिससे उनकी खुशी और आत्मविश्वास दोगुना हो गया।

एक नई उड़ान – शिक्षकों और आयोजकों की भावनाएँ
इस अवसर पर आशा स्कूल, बरेली के प्रधानाचार्य डॉ. विवेक सिंह ने कहा, "इन बच्चों की रचनात्मकता को देखकर यह स्पष्ट है कि उन्हें केवल अवसरों की आवश्यकता है। यह आयोजन न केवल उनके आत्म-सम्मान को बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि उन्हें समाज में अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा भी देगा।"

यादों के रंगों में सजा एक सुनहरा दिन
कार्यक्रम का समापन हर्षोल्लास और मिठास से भरा रहा। बच्चों ने स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया और अपनी कलाकृतियों को गर्व से साझा किया। उनके चेहरे की मुस्कान और चमकती आँखें इस बात की गवाही दे रही थीं कि यह दिन उनके लिए कितना खास था।

"दिल से कैनवास तक" सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समावेशी शिक्षा और रचनात्मकता की दिशा में एक मजबूत कदम था। यह साबित करता है कि हर बच्चा अपनी अलग प्रतिभा के साथ खास होता है और जब उसे सही मंच मिलता है, तो वह अपनी दुनिया को खूबसूरत रंगों से सजा सकता है।