दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई 2026 को सेंट्रल दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी को गोली लगने की खबरों को खारिज किया है। पुलिस ने आधिकारिक मेडिकल-लीगल सर्टिफिकेट (MLC) का हवाला देते हुए कहा कि घायल व्यक्ति को सिर्फ मामूली चोट लगी थी और मेडिकल जांच में गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला।
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावे MLC रिपोर्ट से सही साबित नहीं होते हैं। पुलिस के मुताबिक, MLC में दाहिने कान के आगे चोट का जिक्र है, जिसकी प्रकृति ब्लंट यानी किसी कुंद वस्तु से लगी चोट बताई गई है। डॉक्टर की राय के अनुसार, यह साधारण चोट है और इसमें गोली लगने के कोई सबूत नहीं मिले।
दिल्ली पुलिस ने कहा, "इसलिए, गोली लगने का दावा MLC में दर्ज मेडिकल जांच के निष्कर्षों से समर्थित नहीं है। लोगों से अपील है कि ऐसे दावों को शेयर करने से पहले आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।" वहीं, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को राजधानी में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने छात्रों पर कथित बल प्रयोग को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "पूरे देश ने देखा कि क्या हुआ। एक छात्र की आंख चली गई।"
कांग्रेस नेता प्रणिति शिंदे ने भी नई दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट की निंदा करते हुए कहा कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया। इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री या तो इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं या फिर उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में दो ही संभावनाएं हैं। पहली, गृह मंत्री ने कार्रवाई का आदेश दिया हो। दूसरी, गृह मंत्री को इस बात की जानकारी न हो कि गोलीबारी होने वाली है। उन्होंने कहा कि पहली स्थिति में गृह मंत्री जिम्मेदार हैं और दूसरी स्थिति में वह अक्षम हैं।